India Pakistan Ceasefire: भारत-पाकिस्तान के बीच सरहद पर एक बार फिर बारूद की बू फैल चुकी है. पहलगाम में 26 बेगुनाहों के खून का बदला भारत ने जिस अंदाज में लिया, उससे इस्लामाबाद की नींद उड़ चुकी है. पाकिस्तान न सिर्फ बौखलाया हुआ है बल्कि अपनी पुरानी आदतों पर भी कायम है. वही नापाक हरकतें, वही चालबाजियां. कल ही दोनों देशों ने युद्धविराम का ऐलान किया था, लेकिन पाकिस्तान ने महज 3 घंटे में ही इस वादे की धज्जियां उड़ा दीं. अब इस धोखेबाज़ी पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी तंज कसते हुए शायराना अंदाज में पाकिस्तान को आइना दिखा दिया है.
भारत-पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता के बावजूद पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम उल्लंघन के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने करारा परोक्ष हमला बोला. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, उसी फितरत है मुकर जाने की, उसे वादे पे यकीन कैसे करूं?' इस शेर के जरिए उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान की अविश्वसनीयता पर सवाल उठाए.

यह टिप्पणी उस वक्त आई जब शनिवार रात नियंत्रण रेखा (LoC) के पास पाकिस्तानी मिसाइलें देखी गईं और कई जगह धमाकों की आवाजें सुनाई दीं. इससे कुछ ही घंटे पहले, समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में थरूर ने कहा था, 'शांति बहुत ज़रूरी है. अभी और जानकारी का इंतजार है, लेकिन मैं संतुष्ट हूं कि भारत का लक्ष्य दीर्घकालिक युद्ध नहीं था. हमारा उद्देश्य आतंकवादियों को सबक सिखाना था, जो मैं समझता हूं कि पूरा हो चुका है.
शशि थरूर ने पहले भी ऑपरेशन सिंदूर की खुलकर तारीफ की थी. उन्होंने न सिर्फ इस सैन्य कार्रवाई की रणनीति की सराहना की, बल्कि इसके नाम और प्रतीकात्मकता की भी तारीफ करते हुए कहा था कि 'ऑपरेशन सिंदूर' एक शानदार नाम है. उन्होंने इसे उस तस्वीर से जोड़ा जो पूरे देश की चेतना में बसी है. पहलगाम हमले में मारे गए नवविवाहित युवक की विधवा, जो अपने पति के शव के पास विलाप करती दिखी थी.
गौरतलब है कि भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी। यह हमला 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बदले में किया गया था. भारत ने पाकिस्तान के युद्धविराम उल्लंघन की कड़ी निंदा की और इसे “विश्वासघात” करार दिया. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली इस स्थिति को “बेहद गंभीरता” से ले रहा है। उन्होंने इस्लामाबाद से अपील की कि वह स्थिति को और न बिगाड़े और जिम्मेदारी से पेश आए.
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