हिमाचल प्रदेश इन दिनों मूसलाधार बारिश की चपेट में है, जिससे राज्य में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. सोमवार को राज्य आपात संचालन केंद्र द्वारा जारी की गई भूस्खलन निगरानी रिपोर्ट ने सरकार और आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है. इस रिपोर्ट में राज्य के 22 स्थानों को भूस्खलन संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है, जिनमें से 17 'उच्च खतरे' और एक स्थान को 'बहुत अधिक खतरे' की श्रेणी में रखा गया है.
कांगड़ा जिले के संधोल को 'बहुत अधिक खतरे' वाले स्थान के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जो इस वक्त सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन गया है. मंडी जिले के 15 स्थान, जिनमें प्रसिद्ध पराशर क्षेत्र, ग्रिफॉन पीक-1 से 10 तक, सनाली और तत्तापानी शामिल हैं, गंभीर खतरे की श्रेणी में हैं. इसके अलावा, कांगड़ा, शिमला और सोलन जिलों के कुछ इलाकों को भी इस सूची में शामिल किया गया है.
20 से 30 जून के बीच हुई बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 44 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 82 लोग घायल हुए हैं. राज्य में 83 मवेशी भी मारे गए हैं. अब तक 35 घर, 8 दुकानें और 26 गौशालाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. इन घटनाओं से करीब 75 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है, जिसमें जल शक्ति और लोक निर्माण विभाग को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची है.
राज्य के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अनुसार, भारी बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश की 390 सड़कें अवरुद्ध हो चुकी हैं. इन सड़कों को खोलने के लिए 110 विभागीय जेसीबी और 132 किराए की मशीनें लगातार काम कर रही हैं. अगले तीन दिनों में सभी सड़कें खोलने का लक्ष्य रखा गया है.
प्रदेश सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में यात्रा से बचें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें. आपदा प्रबंधन टीमें हर संवेदनशील क्षेत्र में तैनात हैं और राज्य सरकार हर आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.
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