Ramadan 2026 iftar time 20 February: रमजान इस्लामी चांद्र कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना माना जाता है. दुनिया भर के मुसलमान इस पूरे महीने रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत में ज्यादा समय बिताते हैं. ये महीना आत्म-संयम, सब्र, दया का होता है. रोजा रखने का मतलब है कि सूर्योदय से पहले से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी खाना-पीना नहीं किया जाता. दिन की शुरुआत सेहरी (सुबह से पहले का भोजन) से होती है और रोजा इफ्तार (सूर्यास्त के बाद का भोजन) से खोला जाता है.
रमजान के दौरान लोग नमाज, कुरआन की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद पर विशेष ध्यान देते हैं. ये महीना इंसान को अपनी गलतियों पर विचार करने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर देता है.
इस्लामी मान्यता के अनुसार रमजान का महीना बहुत खास है क्योंकि इसी महीने में पवित्र कुरआन का अवतरण हुआ था. कुरआन में भी रमजान को वो महीना बताया गया है जिसमें इंसानों के लिए मार्गदर्शन के रूप में कुरआन उतारा गया. इसलिए ये समय इबादत और अल्लाह के करीब होने का अवसर माना जाता है.
रोजा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि बुरे विचारों और गलत कामों से दूर रहने का भी संदेश देता है. इससे इंसान के अंदर धैर्य, अनुशासन और दूसरों के दुख को समझने की भावना पैदा होती है.
भारत में रमजान 2026 की शुरुआत चांद दिखने के बाद हुई. 18 फरवरी 2026, बुधवार की शाम को चांद दिखाई देने के बाद 19 फरवरी 2026, गुरुवार को पहला रोजा रखा गया. हर साल रमजान की शुरुआत चांद के दीदार पर निर्भर करती है, इसलिए इसकी तारीख बदलती रहती है.
रमजान के दौरान सेहरी और इफ्तार का समय हर शहर में अलग-अलग होता है. 20 फरवरी 2026 को कुछ प्रमुख शहरों के समय इस प्रकार रहे:
लखनऊ – सेहरी: सुबह 5:20 बजे, इफ्तार: शाम 6:03 बजे
दिल्ली – सेहरी: सुबह 5:35 बजे, इफ्तार: शाम 6:16 बजे
हैदराबाद – सेहरी: सुबह 5:26 बजे, इफ्तार: शाम 6:21 बजे
मुंबई – सेहरी: सुबह 5:51 बजे, इफ्तार: शाम 6:41 बजे
रमजान का ये पवित्र महीना भाईचारे, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है. ये समय इंसान को अपनी आत्मा को शुद्ध करने और समाज में प्रेम और सद्भाव फैलाने की प्रेरणा देता है.
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