पुणे एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट की फ्लाइट में उस समय हंगामा मच गया जब उड़ान में देरी के बाद यात्रियों को एयरलाइंस की ओर से खाना परोसा गया. घंटों इंतजार के बाद यात्रियों को उम्मीद थी कि कम से कम खाने से राहत मिलेगी, लेकिन जैसे ही उन्होंने पैकेट खोला, उनकी उम्मीदें टूट गईं. खाने की गुणवत्ता देखकर यात्री इस कदर भड़क उठे कि उन्होंने ग्राउंड स्टाफ को ही घेर लिया.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि दर्जनों यात्री एक स्पाइसजेट स्टाफ को घेरे हुए हैं. वे स्टाफ से जबरदस्ती कर रहे हैं कि वह खुद वही खाना खाए जो यात्रियों को परोसा गया है. एक यात्री उसे बैठाकर कहता है, "पहले तू खा... ये कुत्तों वाला खाना है. क्या हम जानवर हैं?" इसके बाद कर्मचारी डर के मारे एक चम्मच खाता है और यात्री पूछते हैं, "क्या ये बिरयानी है?"
Flight Delayed by 7 Hours, Passengers Serve Stale Food Back to Airline Manager pic.twitter.com/jwhppHBkol
— Woke Eminent (@WokePandemic) June 15, 2025
यात्रियों का आरोप है कि जो खाना उन्हें दिया गया वह इतना खराब था कि इंसानों के खाने लायक नहीं था. न स्वाद था, न महक और न ही उसकी बनावट ठीक थी. गुस्साए यात्रियों ने आरोप लगाया कि यह खाना जानवरों से भी बदतर था.
हालांकि घटना दो हफ्ते पुरानी बताई जा रही है, लेकिन जैसे ही ट्विटर (X) पर 'वोक एमिनेंट' नामक यूजर ने वीडियो को शेयर किया, मामला सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया. हजारों लोगों ने एयरलाइंस के खिलाफ नाराज़गी जताई और यात्रियों के साथ हुई बदसलूकी पर सवाल उठाए.
मामला बढ़ता देख स्पाइसजेट ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए आरोपों को सिरे से खारिज किया. एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा, “वीडियो में दिखाई गई घटना दो सप्ताह से अधिक पुरानी है. यात्रियों को जो खाना परोसा गया था, वह ताजा और उच्च गुणवत्ता वाला था, जिसे एक अधिकृत फूड वेंडर से लिया गया था, जो एयरपोर्ट की अन्य एयरलाइनों को भी खाना सप्लाई करता है.”
यह मामला सिर्फ खाने की गुणवत्ता का नहीं है, बल्कि ग्राहक सेवा, यात्रियों की भावनाओं और एयरलाइन की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाता है. जब यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार के बाद यह महसूस हो कि उनकी जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है, तो उनका गुस्सा फूटना स्वाभाविक है.
स्पाइसजेट के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि आज के डिजिटल युग में छोटी सी चूक भी ब्रांड की साख को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है. यात्री सिर्फ समय की पाबंदी ही नहीं, बल्कि सम्मान और गुणवत्ता की उम्मीद भी करते हैं. एयरलाइंस को अब सिर्फ उड़ान ही नहीं, ज़मीन पर दी जाने वाली सेवाओं में भी सुधार करने की ज़रूरत है.
Copyright © 2026 The Samachaar
