भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते ने पंजाब की राजनीति और किसान संगठनों में हलचल मचा दी है. इस समझौते में कृषि क्षेत्र को शामिल किए जाने की खबर सामने आते ही किसान संगठनों के साथ-साथ सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) भी केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आ गई है. किसानों का कहना है कि यह समझौता उनकी रोज़ी-रोटी पर सीधा हमला है, जबकि राजनीतिक दलों के लिए यह मुद्दा अब सियासी अस्तित्व से जुड़ता नजर आ रहा है.
किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने इस व्यापार समझौते को पंजाब के किसानों के हितों के खिलाफ बताया है. उन्होंने राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए एलान किया है कि 5 फरवरी को मुख्यमंत्री भगवंत मान के संगरूर स्थित आवास समेत आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों और 6 मंत्रियों के घरों के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा. पंधेर ने मांग की है कि पंजाब सरकार इस गंभीर मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर अपना स्पष्ट रुख जनता के सामने रखे.
आम आदमी पार्टी की ओर से विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने केंद्र सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उनकी पार्टी कृषि को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का हिस्सा बनाए जाने के सख्त खिलाफ है. उन्होंने साफ कहा कि अगर इस समझौते को रोकने के लिए पार्टी नेताओं को जेल भी जाना पड़ा, तो वे पीछे नहीं हटेंगे. AAP ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन किया जा सकता है.
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी इस समझौते के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. मोर्चा ने 11 फरवरी तक देशभर के गांवों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले जलाने का आह्वान किया है. इसके साथ ही 12 फरवरी को मजदूर संगठनों की प्रस्तावित आम हड़ताल में शामिल होकर विरोध को और तेज करने की घोषणा की गई है.
हरियाणा के किसान नेता अभिमन्यु कोहड़ ने इस समझौते को भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” बताया है. उनका कहना है कि अगर यह समझौता लागू हुआ, तो देश के छोटे और मझोले किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. उन्होंने सभी किसान संगठनों से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की.
कृषि प्रधान राज्य पंजाब में किसानों का यह तीखा विरोध भारतीय जनता पार्टी के लिए भी बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है. राज्य में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही बीजेपी के लिए यह मुद्दा भविष्य की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है. अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के अगले कदम और पंजाब में संभावित बड़े किसान आंदोलन पर टिकी हैं.
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