Punjab DM Gagandeep Case: पंजाब में दिवंगत डीएम गगनदीप सिंह के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ ने अंतिम अरदास में शामिल होने के बाद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि इस मामले में सरकार और आरोपियों के बीच मिलीभगत हो सकती है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. जाखड़ ने कहा कि पुलिस द्वारा आरोपी लालजीत भुल्लर की गिरफ्तारी को लेकर भ्रम की स्थिति है.
एक तरफ पुलिस गिरफ्तारी का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आरोपी खुद सरेंडर की बात कह रहा है. जाखड़ के अनुसार, इस तरह के विरोधाभासी बयान एफआईआर को कमजोर करने की कोशिश हो सकते हैं.
जाखड़ ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पांच दिन की पुलिस रिमांड खत्म होने के बावजूद अब तक मुख्य सबूत बरामद नहीं किए जा सके हैं. खासकर वह मोबाइल फोन, जिससे कथित तौर पर पीड़िता का वीडियो बनाया गया था, अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगा है.
उन्होंने यह भी कहा कि घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्डिंग का गायब होना बेहद चिंताजनक है. इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं और जांच की पारदर्शिता पर भी असर पड़ता है.
जाखड़ ने आरोप लगाया कि एफआईआर से कुछ महत्वपूर्ण धाराएं हटा दी गई हैं, जिनमें आर्म्स एक्ट भी शामिल है. उनका कहना है कि जब आरोपियों पर हथियार दिखाकर धमकाने के आरोप हैं, तो ऐसी धाराओं को हटाना समझ से परे है. इसके अलावा सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने जैसी धाराएं भी शामिल नहीं की गईं, जो जांच को प्रभावित कर सकती हैं.
जाखड़ ने कहा कि भाजपा इस मामले में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और जल्द ही सीबीआई जांच की मांग को लेकर अभियान शुरू करेगी. उन्होंने बताया कि राज्य के सांसदों और विधायकों से हस्ताक्षर कराए जाएंगे ताकि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद नजर आ रहे हैं. जाखड़ ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले से ध्यान भटकाने के लिए अन्य मुद्दों को उछाल रही है.
इस पूरे मामले ने पंजाब की राजनीति को गर्मा दिया है और अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिल पाता है.
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