खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने 20 मई 2025 को विश्व मधुमक्खी दिवस ‘स्वीट रेवोल्यूशन उत्सव’ के रूप में पूरे उत्साह से मनाया। इस वर्ष का विषय था – "प्रकृति से प्रेरणा लें, सभी को पोषण दें", जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वीट रेवोल्यूशन’ के दृष्टिकोण पर आधारित है।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन KVIC के अध्यक्ष मनोज कुमार ने किया। उनके साथ KVIC की CEO श्रीमती रूप राशि भी मौजूद थीं। इस उत्सव में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आए लाभार्थी मधुमक्खी पालकों, प्रशिक्षुओं, वैज्ञानिकों, छात्रों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
मनोज कुमार ने कहा कि मधुमक्खियाँ केवल शहद ही नहीं बनातीं, बल्कि परागण के जरिए खेती में भी मदद करती हैं और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘हनी मिशन’ से ग्रामीण भारत में रोज़गार के नए अवसर बने हैं।
अब तक KVIC ने 2,29,409 मधुमक्खी बक्से और कॉलोनियाँ देशभर में बाँटी हैं।
इसके जरिए लगभग 20,000 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ है, जिससे मधुमक्खी पालकों को ₹325 करोड़ की आमदनी हुई।
वित्त वर्ष 2024-25 में KVIC से जुड़े पालकों ने ₹25 करोड़ का शहद विदेशों में निर्यात किया।
KVIC की CEO श्रीमती रूप राशि ने कहा कि हनी मिशन सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि एक समग्र आजीविका मॉडल है। इससे हजारों महिलाएं, युवा और किसान आत्मनिर्भर हो रहे हैं।
सेंट्रल बी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (CBRTI), पुणे की ऐतिहासिक भूमिका को भी सराहा गया, जिसने 1962 से अब तक 50,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि मधुमक्खियाँ लगभग 75% खाद्य फसलों की परागण में योगदान देती हैं। यदि ये न हों, तो 30% खाद्य फसलों और 90% वन्य पौधों के अस्तित्व पर खतरा आ जाएगा।
कार्यक्रम में बच्चों ने कविताएँ, नाटक और लेख प्रस्तुत कर सांस्कृतिक रंग भी भरा। देशभर के लाभार्थियों ने अपनी सफलता की कहानियाँ वर्चुअली साझा कीं।
इस अवसर ने न केवल ग्रामीण भारत में आत्मनिर्भरता का संदेश दिया, बल्कि मधुमक्खियों की जैविक और आर्थिक अहमियत को भी उजागर किया।"
Copyright © 2026 The Samachaar
