टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले क्रिकेट जगत में चल रही चर्चाओं के बीच जय शाह ने बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए यह स्पष्ट किया कि किसी भी खेल संस्था से कोई टीम बड़ी नहीं हो सकती। उनका यह बयान ऐसे समय में आया जब कुछ टीमों के टूर्नामेंट में भाग लेने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। मुंबई में आयोजित एक अवार्ड कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के आयोजन से पहले कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। कुछ लोग यह सवाल उठा रहे थे कि कौन-सी टीम खेलेगी और कौन-सी नहीं। लेकिन एक प्रशासक के रूप में उनका मानना है कि खेल संस्था की गरिमा सबसे ऊपर होती है।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के अध्यक्ष के रूप में जय शाह ने कहा कि क्रिकेट जैसी वैश्विक संस्था सभी टीमों के सामूहिक सहयोग से बनती है। उन्होंने कहा कि किसी एक टीम के होने या न होने से संस्था की पहचान तय नहीं होती। शाह के मुताबिक, जब भी बड़ा टूर्नामेंट आयोजित होता है तो कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं, लेकिन खेल की भावना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कारण ऐसे आयोजन सफल होते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार टूर्नामेंट की लोकप्रियता और दर्शकों की संख्या ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं।
अपने संबोधन में जय शाह ने एसोसिएट देशों की टीमों के प्रदर्शन की खास तौर पर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस बार कई छोटी टीमों ने बड़ी टीमों को कड़ी चुनौती दी, जो क्रिकेट के बढ़ते स्तर का संकेत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ मुकाबलों में अपेक्षाकृत कम अनुभव वाली टीमों ने दिग्गज टीमों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया।
इससे यह साबित होता है कि क्रिकेट अब केवल कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
कार्यक्रम के दौरान जय शाह ने भारतीय टीम के खिलाड़ियों को भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी या टीम को शीर्ष पर पहुंचने में वर्षों की मेहनत लगती है, लेकिन उस मुकाम को बनाए रखना और भी कठिन होता है।
उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि निरंतर मेहनत और अनुशासन ही सफलता की कुंजी है। अगर खिलाड़ी लगातार मेहनत करते रहेंगे तो उन्हें हर साल सम्मान और उपलब्धियां मिलती रहेंगी।
जय शाह के इस बयान को क्रिकेट प्रशासन और खेल की वैश्विक व्यवस्था के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। उनका संदेश साफ था कि खेल की संस्थाएं और उनकी नीतियां सबसे ऊपर होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान क्रिकेट प्रशासन की स्पष्ट नीति और खेल की निष्पक्षता को मजबूत करने में मदद करते हैं।
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