नई दिल्ली : डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए ये बेहद जरूरी है कि वे अपने खान-पान पर जरूर ध्यान दें. खासतौर पर रोटी और चावल जैसी चीजों की मात्रा और समय का सही निर्धारण करना बहुत जरूरी है. अक्सर लोग चावल खाने से इसलिए परहेज करते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि इससे उनका शुगर लेवल बढ़ सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कर्नाटक में उगने वाला राजामुडी चावल इस डर को काफी हद तक दूर कर सकता है?
राजामुडी चावल न सिर्फ अपने खास स्वाद और सुगंध के लिए जाना जाता है, बल्कि इसके पोषक तत्व भी इसे खास बनाते हैं. ये चावल सामान्य सफेद चावल से आकार में बड़ा, रंग में लाल-भूरा और बनावट में कुछ अलग होता है. पारंपरिक रूप से कर्नाटक के शाही परिवार इसे खाते थे. अब ये आम लोगों के बीच भी फेमस हो रहा है, खासकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में.
फाइबर से भरपूर: ये चावल पाचन क्रिया को बेहतर करता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है. इससे बार-बार खाने की आदत पर भी कंट्रोल रहता है.
शुगर लेवल को बैलेंस रखे: इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बाकी चावलों की तुलना में कम होता है, जिससे ये डायबिटीज के रोगियों के लिए ज्यादा सही माना जाता है. इसके सेवन से खून में ग्लूकोज धीरे-धीरे बढ़ता है, जिससे ऊर्जा लंबे समय तक बनी रहती है.
पोषण से भरपूर: इसमें आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस जैसे जरूरी मिनरल्स और विटामिन्स मौजूद होते हैं जो शरीर की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाते हैं.
एंटीऑक्सिडेंट्स का खजाना: इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की संभावना को कम करते हैं. साथ ही ये इम्यूनिटी को भी मजबूत करता है.
राजामुडी चावल पोषण और फायदे के मामले में ब्राउन राइस के काफी करीब है और सफेद चावल से कहीं ज्यादा फायदेमंद है, क्योंकि सफेद चावल प्रोसेसिंग के दौरान अपने अधिकांश पोषक तत्व खो देता है. इसलिए यदि आप चाहें तो राजामुडी चावल को अपनी डेली डाइट में शामिल कर सकते हैं.
ध्यान दें: ये जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य से दी गई है. किसी भी प्रकार का बदलाव करने से पहले डॉक्टर से राय जरूर लें.
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