भारत में रसोई गैस की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। आज देश के करोड़ों घरों में एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके बावजूद, देश अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगवाता है। खासकर खाड़ी देशों पर निर्भरता बढ़ने से ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बजट दोनों पर असर पड़ता है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी पहलों की वजह से रसोई गैस की मांग में तेजी आई है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता बन चुका है। लेकिन देश की रिफाइनरियां केवल 40% जरूरत पूरी कर पाती हैं। बाकी 60% के लिए भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे वैश्विक संकटों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
कतर भारत का प्रमुख एलपीजी सप्लायर है। देश अपनी कुल गैस आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा कतर से मंगवाता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, कतर ने भारत को 53 लाख मीट्रिक टन एलपीजी दिया, जिसका मूल्य 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। यह साझेदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कतर के बाद यूएई भारत का दूसरा बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता है। इसके अलावा कुवैत और सऊदी अरब भी भारत को गैस भेजते हैं। ये देश भारत के सप्लाई नेटवर्क की नींव हैं। अगर इस क्षेत्र में कोई बड़ा संघर्ष होता है, तो वैकल्पिक आपूर्ति के रास्ते भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
ईरान और खाड़ी देशों के बीच स्थित हॉर्मुज जलडमरूमध्य वह मार्ग है, जिससे अधिकांश एलपीजी भारत तक आता है। दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। यदि यह मार्ग बंद हो जाए, तो भारत की गैस सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
ईरान और पड़ोसी देशों के बीच तनाव समुद्री मार्ग और आपूर्ति को सीधे प्रभावित करता है। सप्लाई कम होने से घरेलू सिलेंडरों के दाम बढ़ सकते हैं। युद्ध या संघर्ष की स्थिति में बीमा और ढुलाई की लागत भी बढ़ जाती है, जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
भारत अब विविधता बढ़ाकर ओवर-डिपेंडेंसी कम करने की कोशिश कर रहा है। रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाना और सामरिक भंडारण मजबूत करना इसका मुख्य हिस्सा है। साथ ही, अन्य देशों के साथ नए समझौते करके संकट की स्थिति में घरेलू गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना है।
बीते समय में 'सेवन सिस्टर्स' नामक बड़ी तेल कंपनियों का वैश्विक बाजार पर दबदबा था। उनके बनाए नियम आज भी ऊर्जा व्यापार पर असर डालते हैं। हालांकि अब राष्ट्रीय कंपनियां और खाड़ी देशों के निगम मार्केट नियंत्रित करते हैं, फिर भी पुराने व्यापारिक मार्ग और सुरक्षा नियम वैश्विक ऊर्जा राजनीति में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
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