दलाई लामा ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि उनकी मृत्यु के बाद भी दलाई लामा की संस्था का अस्तित्व बना रहेगा. इस घोषणा से न केवल तिब्बतियों को भावनात्मक बल मिला है, बल्कि दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों को भी भरोसा मिला है कि करुणा, अहिंसा और तिब्बती सांस्कृतिक पहचान की यह 600 साल पुरानी परंपरा अब भी जीवित रहेगी.
दलाई लामा ने यह घोषणा हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आयोजित धार्मिक नेताओं की बैठक के उद्घाटन के दौरान एक वीडियो संदेश में की. उन्होंने कहा, "मैं यह पुष्टि करता हूं कि दलाई लामा की संस्था आगे भी जारी रहेगी.
14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो, जो वर्तमान में निर्वासन में हैं, ने यह निर्णय तिब्बती समुदाय और हिमालयी क्षेत्रों, मंगोलिया, रूस और चीन के बौद्धों की अपीलों पर लिया. उन्होंने कहा, "मुझे विशेष रूप से तिब्बत के अंदर से विभिन्न माध्यमों से संदेश प्राप्त हुए हैं, जिनमें दलाई लामा की परंपरा को जारी रखने की गुजारिश की गई है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह फैसला व्यापक जनभावनाओं के अनुरूप लिया गया है और इसका मकसद तिब्बती पहचान और विश्वास की रक्षा करना है.
दलाई लामा की घोषणा के बाद चीन ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "दलाई लामा का पुनर्जन्म केवल चीन सरकार की मंजूरी से ही मान्य होगा. चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, "दलाई लामा और पंचेन लामा जैसे बौद्ध नेताओं का पुनर्जन्म सुनहरी कलश विधि और केंद्रीय सरकार की अनुमति से ही मान्य होगा. यह वही विवादित प्रक्रिया है, जिसे 18वीं सदी में किंग वंश के सम्राट ने लागू किया था, और जिसे तिब्बती समुदाय धर्म और परंपरा के साथ जबरन छेड़छाड़ मानता है.
दलाई लामा ने जोर देकर कहा कि उनके उत्तराधिकारी की पहचान केवल गदेन फोद्रांग ट्रस्ट द्वारा की जाएगी. उन्होंने कहा, मैं दोहराता हूं कि भविष्य में दलाई लामा के पुनर्जन्म की पहचान का एकमात्र अधिकार गदेन फोद्रांग ट्रस्ट के पास होगा; किसी और को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.
यह बयान चीन को स्पष्ट संदेश है कि धार्मिक मामलों में राजनीतिक दखल अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. तिब्बती समुदाय में खुशी की लहर तिब्बती एक्टिविस्ट चेमी ल्हामो ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कह कि इसमें कोई संदेह नहीं कि दलाई लामा की संस्था न केवल तिब्बतियों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए हितकारी सिद्ध होती रहेगी. उन्होंने आगे कहा कि यह घोषणा चीन को यह स्पष्ट संदेश देती है कि अगले दलाई लामा की पहचान में उसकी कोई भूमिका नहीं होगी.
यह उल्लेखनीय है कि दलाई लामा ने 2011 में ही तिब्बती निर्वासित सरकार को राजनीतिक अधिकार सौंप दिए थे, जो अब दुनियाभर में फैले 1.3 लाख तिब्बतियों द्वारा लोकतांत्रिक रूप से चुनी जाती है. लेकिन दलाई लामा ने यह चेतावनी भी दी कि, पुनर्जन्म की परंपरा में राजनीतिक स्वार्थों के हस्तक्षेप का खतरा अब भी बना हुआ है.
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