देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में से एक, HDFC बैंक, के शेयर आज काफी नीचे आए। बाजार खुलते ही बैंक के शेयर 9% तक गिरकर 770 रुपये पर पहुंच गए, जो इस साल का नया निचला स्तर है। इस गिरावट की वजह से बैंक का मार्केट कैप करीब 1 लाख करोड़ रुपये कम हो गया। इसके अलावा, अमेरिका में लिस्टेड HDFC बैंक के ADR (American Depositary Receipt) में भी 7% से ज्यादा की गिरावट देखी गई।
शेयर बाजार में यह गिरावट अचानक आई क्योंकि बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती (Atanu Chakraborty) ने 18 मार्च को इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि बैंक के कामकाज और नैतिक मूल्यों में तालमेल नहीं है। इस खबर ने निवेशकों में डर पैदा कर दिया और शेयरों की बिक्री तेज हो गई।
इस मामले में HDFC बैंक के डायरेक्टर केकी मिस्त्री (Keki Mistry) और MD & CEO सशिधर जगदीशन (Sashidhar Jagdishan) ने निवेशकों और मीडिया को आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बोर्ड के सदस्य मनोज चक्रवर्ती (Manoj Chakraborty) के इस्तीफे का बैंक के कामकाज या लाभ पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
केकी मिस्त्री ने बताया कि RBI की ऑडिट पूरी हो चुकी है और बैंक का Risk Management System मजबूत है। CEO सशिधर जगदीशन ने कहा कि चेयरमैन के पत्र में उठाए गए मुद्दों की बोर्ड को कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बैंक की वैल्यू उनके विचारों से मेल नहीं खाती, तो उन्होंने यह पद कभी नहीं लिया होता।
बैंक ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि व्यापार की स्थिरता पहले जैसी ही है। संचालन क्षमता (Execution Capability) में कोई बदलाव नहीं आया है।Governance, Integrity और Value Creation पर ध्यान लगातार बना रहेगा। बैंक की रणनीति (Strategic Direction) और प्राथमिकताएँ (Priorities) अब भी वैसी ही हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी पुष्टि की है कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार HDFC बैंक के कामकाज या गवर्नेंस में कोई गंभीर कमी नहीं है। बैंक की वित्तीय स्थिति संतोषजनक है और उसके पास पर्याप्त लिक्विडिटी भी मौजूद है।
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