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किसानों को बड़ी राहत; केंद्र ने खरीफ फसलों के लिए MSP बढ़ाया

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विपणन सत्र 2025-26 के लिए 14 प्रमुख खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है।

  • Saurabh | 28 May 2025 06:42 PM
किसानों को बड़ी राहत; केंद्र ने खरीफ फसलों के लिए MSP बढ़ाया

केंद्र सरकार ने विपणन वर्ष 2025-26 के लिए 14 प्रमुख खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने का फैसला किया है। यह फैसला किसानों को उनकी फसल के अच्छे दाम देने और खेती को लाभदायक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

किस फसल के MSP में कितनी बढ़ोतरी हुई?

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी नाइजरसीड (820 रुपये प्रति क्विंटल) की हुई।

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रागी के लिए 596 रुपये, कपास के लिए 589 रुपये और तिल के लिए 579 रुपये की बढ़ोतरी।

धान के MSP में 69 रुपये की वृद्धि की गई है।

दालों में अरहर (450 रुपये), मूंग (86 रुपये) और उड़द (400 रुपये) बढ़े हैं।

तिलहनों में मूंगफली (480 रुपये), सूरजमुखी (441 रुपये) और सोयाबीन (436 रुपये) की MSP बढ़ी है।

क्यों बढ़ाए गए MSP?

सरकार ने साल 2018-19 के बजट में यह तय किया था कि MSP किसानों की औसत लागत का कम से कम 1.5 गुना होना चाहिए। इस नीति को ध्यान में रखते हुए ही फसलों के MSP तय किए गए हैं।

उदाहरण के लिए:

बाजरा पर किसानों को लागत से 63% ज्यादा मिलेगा।

मक्का और अरहर में 59% ज्यादा लाभ।

उड़द पर 53% और बाकी फसलों में करीब 50% का फायदा मिलेगा।

सरकार का लक्ष्य क्या है? सरकार सिर्फ गेहूं और चावल नहीं, बल्कि दालों, तिलहनों और पोषक अनाजों (जैसे रागी, बाजरा) को भी बढ़ावा देना चाहती है। इसलिए इन फसलों की MSP ज्यादा रखी जा रही है।

अब तक किसानों को कितना फायदा मिला? 2014-15 से 2024-25 के बीच किसानों को 16.35 लाख करोड़ रुपये MSP के तहत दिए गए।

2004-05 से 2013-14 के बीच यह राशि केवल 4.75 लाख करोड़ रुपये थी।

इसी तरह धान की खरीद भी बढ़कर 7,608 लाख मीट्रिक टन (LMT) हुई, जो पहले केवल 4,590 LMT थी।

भारत में तीन फसल मौसम होते हैं: खरीफ (जून-जुलाई में बोई जाती, अक्टूबर-नवंबर में कटती है)

रबी (अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती, जनवरी के बाद कटती है)

ग्रीष्मकालीन फसलें (खरीफ और रबी के बीच बोई जाती हैं)

सरकार का ये कदम किसानों को प्रोत्साहन देने और उन्हें उनकी मेहनत का उचित दाम दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे दालें, तेल-बीज और पोषक अनाज जैसी फसलों की खेती बढ़ेगी और खेती को ज्यादा टिकाऊ और लाभदायक बनाया जा सकेगा।

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