भारत-पाकिस्तान के बीच 2025 में छिड़े ताजा तनाव के बीच अगर सोशल मीडिया पर कुछ सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहा है, तो वह है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इंदिरा गांधी के चर्चे. पहलगाम हमले का जवाब भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के जारिए दिया और पाक सेना को मुंह की खानी पड़ी. लेकिन ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों के पोस्ट्स, मीम्स और वीडियो में इंदिरा गांधी की तस्वीरें और उनके 1971 के फैसलों की गूंज साफ सुनाई दे रहा है.
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के तहत जिस तरह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और PoK के अंदर घुसकर आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक्स की, उसने लोगों को बरबस ही 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की याद दिला दी. उस समय इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को धूल चटाई थी और मात्र 13 दिन में 93,000 पाक सैनिकों को सरेंडर करवा कर नया देश बांग्लादेश बना दिया था.
सोशल मीडिया पर हैशटैग्स जैसे #ModiAsIndira #New1971Moment और #OperationSindoor ने धूम मचा रखी है. लोग लिख रहे हैं -'मोदी का दिल इंदिरा गांधी जैसा, जवाब वही पुराना लेकिन अंदाज नया!'1971 में इंदिरा ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे, क्या अब मोदी तीसरा टुकड़ा करेंगे?'
तो वहीं कुछ लोग कह रहे हैं मोदी जी आपसे ये उम्मीद नहीं थी. एक प्रकार से देखा जाए तो भारत और पाक के बीच संघर्ष चल रहा है अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ट्वीट आता है दोनों देशों के बीच बातचीत हो गई और सीजफायर के लिए दोनों देश तैयार यानी पहले हिंदुस्तान की ओर से ट्वीट न होकर अमेरिका से होकर हैरान कर देता है तो वही ट्रंप पूरा क्रेडिट लेने के फीराक में दौड़ जाते हैं लेकिन नापाक उनका ये घमंड तीन घंटे में चकनाचूर करके गजब की बेइज्जती कर देता है तो वहीं फिर इसी दौरान से लोग सोशल मीडिया में 1971 के युद्ध की चर्चा करने लगते हैं.
इतिहास को अगर आज के हालात से जोड़ें तो इंदिरा गांधी की तुलना इसलिए हो रही है क्योंकि दोनों समय भारत ने पहले हमला नहीं किया लेकिन जवाब ऐसा दिया कि पूरी दुनिया दंग रह गई. जहां इंदिरा गांधी के समय बांग्लादेश बना, वहीं लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत में मिला लिया जाएगा. राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि इंदिरा गांधी की आक्रामक लेकिन रणनीतिक सोच और मोदी की आज की नीति में कई समानताएं हैं. हालांकि, कई लोग यह भी लिख रहे हैं कि आज के वैश्विक दबाव और परिस्थितियां 1971 से अलग हैं, इसलिए तुलना सतर्कता से करनी चाहिए.
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