लू लगने का प्रमुख कारण तेज धूप और गर्मी में ज्यादा देर तक रहने से शरीर में पानी और खनिज, विशेषकर नमक, की कमी हो जाना होता है। इसके लक्षणों में गर्म, लाल और सूखी त्वचा, शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104 फारेनहाइट तक पहुंच जाना, उल्टी आना, बहुत तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, चक्कर आना, बेहोशी और हल्का सिरदर्द शामिल हैं।
लू से बचने के उपायों के तहत अधिक मात्रा में पानी पीना और छाछ, लस्सी, मट्ठा, फलों का रस जैसे तरल पेय पदार्थों का सेवन बढ़ाना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को घर से बाहर कम निकलना चाहिए, विशेष रूप से दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर के अंदर ही रहें। धूप में बाहर जाने से पहले सिर और कानों को अच्छी तरह से ढक लें। गर्मी के दौरान हल्के, नरम और ढीले सूती कपड़े पहनें। अगर कोई व्यक्ति लू से प्रभावित हो जाए, तो उसे अधिक पानी और पेय पदार्थ जैसे आम का पना और जलजीरा पिलाएं, और उसे छायादार और ठंडी जगह पर आराम करने के लिए लेटाएं। लू से प्रभावित व्यक्ति को ओ.आर.एस. का घोल पिलाएं और ठंडे पानी की पट्टियां रखें। डॉक्टर से संपर्क करें या 108 एम्बुलेंस को बुलाएं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मोहनसिंह सिसोदिया ने सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं को लू के प्रबंधन और बचाव के लिए विस्तृत और सख्त निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में सबसे पहले ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों और उनके साथ आने वाले लोगों के लिए बैठने की उचित और आरामदायक व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है, ताकि वे धूप और गर्मी से बच सकें। इसके अलावा, हर स्वास्थ्य संस्थान में ठंडे पेयजल की निरंतर और पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि मरीज और अन्य लोग जरूरत पड़ने पर आसानी से पानी पी सकें और गर्मी से राहत पा सकें।
प्रत्येक मरीज को लू से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी देना भी आवश्यक है। इसमें मरीजों को बताया जाना चाहिए कि वे दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचें, हल्के और ढीले कपड़े पहनें, और खूब पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें। इसके साथ ही, लू के संभावित लक्षणों जैसे सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, और उल्टी के बारे में भी जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वे समय पर पहचान सकें और उचित उपचार ले सकें।
स्वास्थ्य संस्थाओं को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि लू के उपचार के लिए आवश्यक सभी दवाइयां और सामग्री उपलब्ध रहें। इसमें ओआरएस के घोल, प्राथमिक उपचार की किट, और अन्य आवश्यक दवाइयां शामिल हैं, जो लू से प्रभावित मरीजों को त्वरित राहत प्रदान कर सकें। इसके अलावा, चिकित्सकों और नर्सों को लू के मामलों को प्राथमिकता देने और तेजी से उपचार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
डॉ. सिसोदिया ने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे मरीजों के साथ धैर्य और संवेदनशीलता के साथ पेश आएं, ताकि मरीज और उनके परिजन आराम और विश्वास महसूस कर सकें। इस तरह के व्यापक और समर्पित उपायों से लू के प्रकोप को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है और मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
Copyright © 2026 The Samachaar
