किसी भी शुभ कार्य, कार्यक्रम या उद्घाटन के समय दीपक प्रज्ज्वलित करना एक प्राचीन परंपरा है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक सिर्फ रौशनी का साधन नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक है। प्रसिद्ध ज्योतिषी डॉ. बसवराज गुरुजी के अनुसार, दीपक की ज्योति सर्वोच्च ब्रह्म और भगवान जनार्दन का स्वरूप है। यह हमारे पापों और अज्ञान को दूर करके जीवन में ज्ञान और प्रकाश लाती है।
गुरुजी बताते हैं कि भगवान को जो भी भोग या अर्पण किया जाता है, वह अग्नि के माध्यम से अर्पित होता है। इसी तरह, दीपक की लौ भगवान के लिए प्रार्थना का प्रतीक है। दीपक की लौ हमेशा ऊपर की ओर जलती है, जो विकास, प्रगति और समृद्धि का संकेत देती है। इसलिए पूजा और शुभ कार्य दीपक के बिना अधूरे माने जाते हैं।
दीपक सिर्फ प्रकाश नहीं देता, बल्कि हमारे आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को भी मिटाता है। गुरुजी के अनुसार, दीपक गुरु का प्रतीक भी है और इसकी ज्योति अज्ञान को दूर कर ज्ञान की ओर ले जाती है। सभाओं और समारोहों में दीपक जलाकर अग्निदेव से प्रार्थना की जाती है कि इस कार्य में उनकी कृपा बनी रहे। अग्नि सूर्य का प्रतीक है और यह पाँच तत्वों—आकाश, पृथ्वी, जल, वायु और अग्नि—को संतुलित रखने में मदद करती है।
चाहे छोटा व्यवसाय हो या बड़ा, दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है। गुरुजी का कहना है कि किसी भी जगह पहली बार दीपक जलाने से चारों दिशाओं में फैल रही नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त हो जाती हैं। किसानों के लिए भी दीपक महत्वपूर्ण है। बीज बोने से पहले दो दीपक जलाकर प्रार्थना करने से फसल अच्छी और समृद्ध होती है।
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