Surya Grahan 2026: साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस वर्ष अब तक एक सूर्य ग्रहण और एक चंद्र ग्रहण हो चुका है। पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को अमावस्या के दिन लगा था। इसके बाद 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर चंद्र ग्रहण देखा गया। अब वैज्ञानिकों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों की नजर साल के दूसरे सूर्य ग्रहण पर है। इस बार होने वाला ग्रहण खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें सूर्य का बड़ा हिस्सा चंद्रमा द्वारा ढक जाएगा।
सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है और कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश कम या पूरी तरह छिप जाता है। जब सूर्य का अधिकांश भाग ढक जाता है, तो प्रभावित इलाकों में दिन के समय भी अंधेरा जैसा माहौल बन सकता है। इसी कारण वैज्ञानिक इसे देखने के लिए एक विशेष खगोलीय घटना मानते हैं।
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा। ये ग्रहण अगले दिन यानी 13 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा। इस बार का ग्रहण कंकणाकृति सूर्य ग्रहण होगा। ऐसे ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के बीच में आकर उसका मध्य भाग ढक देता है, जबकि किनारे चमकते रहते हैं। इस कारण सूर्य आकाश में चमकती हुई अंगूठी जैसा दिखाई देता है।
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जब ये ग्रहण लगेगा, उस समय भारत में रात होगी और सूर्य क्षितिज के नीचे होगा। इसी वजह से यहां इसे देखा नहीं जा सकेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। लेकिन यह नियम तभी लागू होता है जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई देता हो। चूंकि यह ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के कामकाज और रोजमर्रा की गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहेंगी।
ये सूर्य ग्रहण मेन रूप से पृथ्वी के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में देखा जा सकेगा। आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों और उत्तरी स्पेन में इसका स्पष्ट दृश्य दिखाई देगा।
इसके अलावा यूरोप के कई देशों में ये आंशिक रूप से नजर आएगा। फ्रांस, ब्रिटेन और इटली जैसे देशों के लोग इस ग्रहण का कुछ हिस्सा देख सकेंगे।
सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण घटना होती है। इस दौरान वैज्ञानिक सूर्य के बाहरी वातावरण और उसकी रोशनी से जुड़े कई पहलुओं का अध्ययन करते हैं। इसलिए हर सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों और आकाश प्रेमियों के लिए एक खास अवसर लेकर आता है।
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