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Chhath Puja 2025 : छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है दो बार? जानिए समय..!

Chhath Puja 2025 : छठ पूजा 2025 में सूर्य देव को दो बार अर्घ्य देना अनिवार्य है. संध्या अर्घ्य आभार और अंत का प्रतीक है, जबकि प्रातःकाल अर्घ्य नई शुरुआत, रोशनी और ऊर्जा का संदेश देता है.

  • Samachaar Desk | 24 Oct 2025 06:52 PM
Chhath Puja 2025 : छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है दो बार? जानिए समय..!

Chhath Puja 2025 : छठ पूजा एक ऐसा महापर्व है जो चार दिन तक मनाया जाता है. इस वर्ष यह 25 अक्टूबर शनिवार से शुरू होकर 28 अक्टूबर को समाप्त होगा. इस पर्व में नहाय-खाय से पूजा की शुरुआत होती है और लोग सूर्य देव तथा छठी मैया की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.

छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य देना क्यों है खास?

छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य देना सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है. बिना अर्घ्य के पूजा अधूरी मानी जाती है. परंपरा अनुसार सूर्य देव को दो बार अर्घ्य दिया जाता है – एक बार डूबते सूर्य को और एक बार उगते सूर्य को.

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पहला अर्घ्य: संध्या के समय डूबते सूर्य को दूसरा अर्घ्य: प्रातःकाल में उगते सूर्य को

इस वर्ष संध्या अर्घ्य 27 अक्टूबर 2025 को दिया जाएगा, जबकि प्रातःकाल का अर्घ्य 28 अक्टूबर 2025 को होगा.

डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व

संध्या अर्घ्य का अर्थ है आभार व्यक्त करना. दिन समाप्त हो रहा है और सूर्य धीरे-धीरे अस्त हो रहा है. यह अनुष्ठान हमें यह सिखाता है कि जीवन में जो कुछ भी मिला, उसके लिए धन्यवाद देना चाहिए. साथ ही संध्या अर्घ्य यह भी याद दिलाता है कि हर अंत हार या समाप्ति नहीं, बल्कि नए आरंभ का संकेत होता है.

उगते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व

प्रातःकाल का अर्घ्य नए प्रकाश, नई शुरुआत और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. जैसे रात के अंधकार के बाद सूरज उगता है, वैसे ही जीवन में अंधेरे के बाद नई रोशनी और अवसर आते हैं. यह अनुष्ठान हमें जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आशा बनाए रखने का संदेश देता है.

छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य देना न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि जीवन में आभार और नई शुरुआत का प्रतीक भी है. संध्या और प्रातःकाल के अर्घ्य जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण और नई ऊर्जा से भर देते हैं.

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