Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होती है। इस साल, 2026 में नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी। पूरे देश में इन नौ दिनों के दौरान माता की भक्ति और उत्सव का माहौल रहता है। भक्त अष्टमी और नवमी का बेसब्री से इंतजार करते हैं, जो इस बार 26 मार्च (अष्टमी और रामनवमी) और 27 मार्च (नवमी) को मनाई जाएगी।
अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं को भोजन कराना खास महत्व रखता है। मान्यता है कि इन दिनों नौ कन्याओं को भोजन कराने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। कन्याओं को माता का स्वरूप माना जाता है और उनका पूजन व आशीर्वाद जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
शास्त्रों के अनुसार, 2 से 10 साल की उम्र की कन्याओं का पूजन करना सबसे लाभकारी होता है। यदि आप किसी कारणवश कन्याओं को घर नहीं बुला सकते, तो उनका भोजन और सामग्री भेंट के रूप में भेजना भी सही माना जाता है।
अष्टमी और नवमी को विशेष रूप से कन्या पूजन के लिए चुना गया है। अष्टमी पर मां महागौरी और रामनवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन घर में आए कन्याओं का स्वागत सादगी और श्रद्धा से करना चाहिए।
पूजन के क्रम में:
1. कन्याओं के पैरों को स्वच्छ जल से धोएं।
2. उनका साफ आसन पर बैठाना।
3. माथे पर कुमकुम का टीका और कलावा बांधना।
4. भोजन से पहले देवी मां को भेंट दें।
5. सभी कन्याओं को भोजन कराएं और अंत में दक्षिणा दें।
नवरात्रि में कन्या पूजन करते समय उनकी उम्र भी महत्वपूर्ण मानी जाती है:
2 साल की कन्या: कौमारी, दुख और दरिद्रता दूर होती है।
3 साल की कन्या: त्रिमूर्ति, धन-धान्य और परिवार का कल्याण।
4 साल की कन्या: कल्याणी, सुख-समृद्धि।
5 साल की कन्या: रोहिणी, रोग मुक्ति।
6 साल की कन्या: कालिका, विद्या और राजयोग।
7 साल की कन्या: चंडिका, ऐश्वर्य।
8 साल की कन्या: शांभवी, लोकप्रियता।
9 साल की कन्या: दुर्गा, शत्रु विजय।
10 साल की कन्या: सुभद्रा, मनोरथ पूर्ति।
कन्या पूजन और भोज से कई जीवन संबंधी समस्याओं का निवारण माना जाता है:
विवाह में देरी: 5 साल की कन्या को भोजन कराएं और श्रृंगार की सामग्री दें।
धन-संबंधी परेशानियां: 4 साल की कन्या को खीर खिलाएं और पीले कपड़े भेंट करें।
शत्रु बाधा या कार्य में रुकावट: 9 साल की कन्याओं को भोजन और कपड़े दें।
पारिवारिक क्लेश: 3 और 10 साल की कन्याओं को मिठाई दें।
बेरोजगारी: 6 साल की कन्या को छाता और कपड़े दें।
सभी प्रकार की समस्याओं का निवारण: 5–10 साल की कन्याओं को भोजन सामग्री, दूध, फल या सौंदर्य सामग्री भेंट करें।
अष्टमी और नवमी पर देवी की पूजा विशेष विधि से की जाती है। इस दिन देवी के शस्त्रों की पूजा, विशेष आहुति और हवन करना शुभ माना जाता है। इसके बाद नौ कन्याओं को भोजन कराएं और रात को भजन-कीर्तन या जागरण के माध्यम से उत्सव मनाएं।
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