भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच चल रही वनडे सीरीज में मैदान पर रन, विकेट और रोमांच की भरमार रही. लेकिन ऑफ-फील्ड एक छोटा-सा वीडियो सोशल मीडिया पर ऐसा वायरल हुआ कि क्रिकेट फैंस दो गुटों में बंट गए. दावा यह किया जा रहा है कि पहले वनडे मैच के बाद विराट कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के कोच शुक्री कोनराड से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया.
हालांकि, अनुभवी फैंस मानते हैं कि 5–6 सेकेंड के कटे-छंटे वीडियो से सच्चाई को समझना लगभग असंभव है. फिर भी यह क्लिप इंटरनेट पर आग की तरह फैल चुकी है.
वायरल फुटेज में भारतीय खिलाड़ी मैच के बाद विपक्षी टीम से हाथ मिलाते दिखाई देते हैं. उसी दौरान कैमरा कोहली पर फोकस करता है, जो दक्षिण अफ्रीका के हेड कोच कोनराड के सामने से गुजरते हैं. वीडियो में यह साफ नहीं दिखता कि कोहली हाथ बढ़ाते हैं या नहीं. इसके तुरंत बाद वह अगली लाइन में मौजूद दो खिलाड़ियों से हाथ मिलाते जरूर नजर आते हैं.
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह वीडियो अधूरा है क्लिप की शुरुआत से पहले क्या हुआ, यह कोई नहीं जानता. यह भी संभव है कि कोहली पहले ही कोच से हाथ मिला चुके हों. इसके बावजूद विवाद इतना बढ़ गया है कि क्लिप पर लाखों व्यूज़ और हजारों कमेंट्स आ चुके हैं.
यह पूरा मामला एक पुराने विवाद से जुड़ गया है, जिसने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को और भड़काया. दरअसल, कोच शुक्री कोनराड ने गुवाहाटी टेस्ट के बाद बयान दिया था कि उनकी टीम ने भारत को “grovel” कराने की रणनीति बनाई थी.
‘Grovel’ शब्द क्रिकेट इतिहास में बेहद संवेदनशील माना जाता है. 1976 में इंग्लैंड के कप्तान टोनी ग्रेग ने वेस्टइंडीज को नीचा दिखाने के लिए यही शब्द इस्तेमाल किया था. इसका नस्लीय संदर्भ भी जुड़ा हुआ है. इसी कारण कोनराड का बयान भारतीय फैंस को पसंद नहीं आया. कई लोग इस क्लिप को उसी बयान से जोड़कर देख रहे हैं. इंटरनेट पर यह नैरेटिव बनाया जा रहा है कि शायद कोहली नाराज थे और इसी वजह से उन्होंने हाथ नहीं मिलाया.
इस पर कोई आधिकारिक बयान ना कोहली की तरफ से आया है और ना ही BCCI की ओर से. लेकिन कोहली का करियर इतिहास बताता है कि वह मैदान पर स्पोर्ट्समैनशिप को गंभीरता से लेते हैं. वह विपक्षी खिलाड़ियों से मजबूत मुंहजबानी जरूर करते हैं, लेकिन मैच के बाद प्रोटोकॉल का सम्मान करते हैं यह उनकी पहचान का हिस्सा है. ऐसे में यह मान लेना कि कोहली ने जानबूझकर हाथ नहीं मिलाया, सिर्फ एक छोटी क्लिप के आधार पर, जल्दबाजी होगी.
सोशल मीडिया पर बहस दो हिस्सों में बंट चुकी है:
सच्चाई क्या है, यह पूरा वीडियो सामने आने पर ही स्पष्ट होगा. तब तक इस बहस से इतना ही समझ आता है कि क्रिकेट सिर्फ बैट और बॉल का खेल नहीं. यह राष्ट्रपति स्तर की पॉलिटिक्स, भावनाओं और सोशल मीडिया की धार पर भी टिका हुआ है.