तमिलनाडु के बहुचर्चित पोलाची यौन शोषण मामले में कोयंबटूर की महिला विशेष अदालत ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने इस मामले में शामिल सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दिया है. आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है, जिनमें सामूहिक बलात्कार, ब्लैकमेलिंग और आपराधिक साज़िश शामिल हैं। सज़ा की घोषणा दोपहर 12 बजे की जाएगी.
2019 में सामने आया था मामला
यह मामला 2019 में उस वक्त सामने आया था जब एक युवती द्वारा दर्ज कराई गई चोरी की शिकायत की जांच में पुलिस को संगठित यौन शोषण रैकेट का पता चला. आरोप है कि युवकों का एक गिरोह महिलाओं से दोस्ती करता, फिर उन्हें आपत्तिजनक स्थितियों में फंसाकर वीडियो बनाता और ब्लैकमेल करता था.
अदालत में पेश हुए पुख्ता सबूत
इस मामले में न्यायाधीश नंधिनी देवी की अदालत में सुनवाई के दौरान CBI ने 400 से अधिक डिजिटल साक्ष्य, 200 दस्तावेज़ और 50 से ज्यादा गवाह प्रस्तुत किए. आठ पीड़िताएं अदालत में पेश हुईं और अपने साथ हुए अत्याचार की जानकारी दी. सरकारी वकील सुरेंद्र मोहन ने बताया कि दोषियों ने सजा में नरमी की गुहार लगाई, लेकिन अभियोजन पक्ष ने अदालत से अधिकतम सज़ा की मांग की है.
वीडियो वायरल होने के बाद मचा था बवाल
इस मामले ने राज्यभर में राजनीतिक और सामाजिक तूफान खड़ा कर दिया था. जब यौन शोषण के वीडियो इंटरनेट पर लीक हुए, तो व्यापक जन आक्रोश और विरोध प्रदर्शन हुए. विपक्षी पार्टियों, विशेषकर DMK, ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया. सरकारी पक्ष ने अदालत में दलील दी कि देश की सर्वोच्च अदालत ने पहले ही कहा है कि ऐसे मामलों में किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई जानी चाहिए, और पोलाची केस एक 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' श्रेणी में आता है.
दोपहर तक आएगा अंतिम फैसला
दोषियों की पहचान थिरुनावुक्करासु, सबरीसन, वसंथ कुमार, सतीश, मणिवन्नन, हरनपॉल, बाबू, अरुलानंथम और अरुण कुमार के रूप में हुई है, जिन्हें 2019 में गिरफ्तार किया गया था और तभी से वे न्यायिक हिरासत में हैं. अब अदालत दोपहर में यह तय करेगी कि उन्हें कितनी सजा दी जाएगी.