Cloud Seeding: दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा का सुखा खत्म हुआ है और इस बार वह प्रदुषण से निपटने के लिए हर कोशिश में लगी हुई है. दिल्ली में जाड़े के दौरान बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार इस बार क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) का ट्रायल करने जा रही है. पर्यावरण विभाग के अनुसार, पांच बार ट्रायल किए जाएंगे, जिनमें हर बार एयरक्राफ्ट डेढ़ घंटे की उड़ान भरेंगे. अलग-अलग दिनों में होने वाले इन ट्रायल्स के नतीजों की समीक्षा के बाद भविष्य में इसे प्रदूषण नियंत्रण उपाय के तौर पर अपनाने पर विचार किया जाएगा.
दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनकर सामने आता है, इस बार दिल्ली सरकार ने इससे निपटने के लिए एक अनोखा और वैज्ञानिक उपाय चुना है- क्लाउड सीडिंग, लेकिन आखिर ये क्लाउड सीडिंग है क्या और यह कैसे काम करती है?
क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें बादलों में कृत्रिम रूप से बारिश कराने के लिए कुछ विशेष रसायनों का छिड़काव किया जाता है. इसके लिए आमतौर पर सिल्वर आयोडाइड (Silver Iodide), पोटैशियम आयोडाइड या सोडियम क्लोराइड जैसे पदार्थों का उपयोग होता है. इन रसायनों को प्लेन या ड्रोन के माध्यम से बादलों में छोड़ा जाता है जिससे पानी की बूंदें बनने लगती हैं और वर्षा होती है.
दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर अक्टूबर से जनवरी के बीच खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है. सरकार का मानना है कि अगर बारिश कराई जा सके तो इससे हवा में मौजूद प्रदूषक कण नीचे बैठ जाएंगे और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में सुधार आएगा.
आईआईटी कानपुर और अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं के साथ मिलकर दिल्ली सरकार क्लाउड सीडिंग की feasibility पर काम कर रही है. इसके लिए संभावित फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी देखा जा रहा है. अनुमान है कि क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया अक्टूबर-नवंबर के बीच की जाएगी, जब प्रदूषण चरम पर होता है.