पंजाब सरकार ने लाल डोरी (लाल लकीर) के भीतर रहने वाले लोगों को उनका कानूनी हक दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है इसी कड़ी में 'मेरा घर मेरे नाम' योजना के तहत लुधियाना के हैबोवाल कलां क्षेत्र में रहने वाले 158 परिवारों को मालिकाना हक के प्रमाण-पत्र सौंपे गए. यह कार्यक्रम गुरुद्वारा साध संगत साहिब के लंगर हॉल में आयोजित किया गया, जहां पंजाब के बिजली मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ और राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा ने खुद लोगों को ये दस्तावेज सौंपे.
इस मौके पर सांसद संजीव अरोड़ा ने कहा कि यह योजना हैबोवाल (वार्ड नंबर 65) के लोगों के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि वे पिछले पचास वर्षों से अपने घरों के कानूनी स्वामित्व की मांग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इस योजना से लोगों को न सिर्फ कानूनी मान्यता मिली है, बल्कि अब वे अपनी संपत्ति को बैंक लोन या किसी अन्य आर्थिक उपयोग में भी ला सकेंगे.
सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम
अरोड़ा ने कहा कि यह पहल लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है. इससे नागरिकों को सिर्फ कागजी अधिकार नहीं बल्कि एक सम्मानजनक पहचान और स्थायित्व भी मिलेगा. उन्होंने यह भी बताया कि जब वह चुनाव प्रचार के दौरान सुनेत, बाड़ेवाल और हैबोवाल क्षेत्र में जा रहे थे, तब लोगों ने बार-बार इस मुद्दे को उठाया था, जिसे अब हल कर दिया गया है.
संजीव अरोड़ा ने याद दिलाया कि इसी महीने की शुरुआत में 6 मई को सुनेत और बाड़ेवाल में 990 परिवारों को मालिकाना हक दिया गया था. तब उन्होंने वादा किया था कि अगला पड़ाव हैबोवाल होगा- और आज उस वादे को निभाया गया.
बिजली मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि यह योजना सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करती है, उन्होंने बताया कि संपत्तियों के स्वामित्व को वैध बनाने से पहले राजस्व अधिकारियों ने पूरी तरह से दस्तावेज़ों का सत्यापन किया, ताकि किसी प्रकार की गलती न हो.
इस कार्यक्रम में लुधियाना की मेयर इंद्रजीत कौर, सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर, डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर, आराधना मणि साई और त्रिशूल औल जैसे कई प्रमुख नेता भी शामिल हुए. यह पहल सिर्फ कानूनी स्वामित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की दिशा में एक सशक्त कदम है - जिसमें लोगों को उनके अधिकार लौटाए जा रहे हैं, जिनसे वे दशकों से वंचित थे.