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दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन कौन सा है? जानिए पहली बार कब और कहां हुआ था इनका इस्तेमाल

क्या आप जानते हैं दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन किस देश के पास है, अगर नहीं जानते तो आज हम आपको बताते हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर और खतरनाक ड्रोन (Unmanned Aerial Vehicles - UAVs) कई देशों ने विकसित किए हैं, जो निगरानी, हमला और सामरिक अभियानों में बेहद सक्षम

👤 Saurabh 12 May 2025 05:55 PM

भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बीच इस बार युद्ध का तरीका पहले से काफी अलग दिखा। बंदूक और मिसाइलों के साथ-साथ इस बार ड्रोन भी एक बड़ा और असरदार हथियार बनकर सामने आया। ऐसे में क्या आप जानते हैं दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन किस देश के पास है, अगर नहीं जानते तो आज हम आपको बताते हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर और खतरनाक ड्रोन (Unmanned Aerial Vehicles - UAVs) कई देशों ने विकसित किए हैं, जो निगरानी, हमला और सामरिक अभियानों में बेहद सक्षम हैं।


MQ-9 Reaper (USA)


निर्माता: General Atomics

उपयोग: निगरानी और हमला दोनों

स्पीड: लगभग 400 किमी/घंटा

उड़ान समय: 27 घंटे

हथियार: Hellfire मिसाइल, GBU-12 बम

क्या है ड्रोन का इतिहास

ड्रोन यानी अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAVs) का इस्तेमाल सबसे पहले पहले विश्व युद्ध के दौरान शुरू हुआ था। उस समय अमेरिका और ब्रिटेन ने पहली बार पायलट के बिना उड़ने वाले छोटे विमानों का प्रयोग किया।

1917 में ब्रिटेन ने रेडियो से चलने वाला 'एरियल टारगेट' बनाया। 1918 में अमेरिका ने ‘केटरिंग बग’ नाम का ड्रोन तैयार किया, लेकिन इन्हें सीधे युद्ध में नहीं लगाया गया। 1935 में, ब्रिटेन ने ‘क्वीन बी’ नाम का पहला रेडियो कंट्रोल ड्रोन बनाया, जिससे आगे चलकर ड्रोन टेक्नोलॉजी की शुरुआत मानी जाती है।

ड्रोन पहले सिर्फ जासूसी के लिए थे

कोल्ड वॉर (ठंडी जंग) के समय ड्रोन का इस्तेमाल पहली बार जासूसी के लिए हुआ। 1950 और 60 के दशक में अमेरिका ने दुश्मन की निगरानी के लिए छोटे टोही ड्रोन बनाए, जिससे पायलटों को खतरे में डाले बिना जानकारी मिल सके। वियतनाम युद्ध में भी अमेरिका ने इनका इस्तेमाल किया।

जब ड्रोन हमला करने लगे

ड्रोन का असली रूप 2000 के आसपास दुनिया ने देखा, जब अमेरिका ने ‘प्रीडेटर ड्रोन’ तैयार किया जो हेलफायर मिसाइलों से लैस था। ये ड्रोन सीधे दुश्मन पर हमला कर सकते थे। अमेरिका ने कई आतंक विरोधी अभियानों में इनका इस्तेमाल किया। 2020 के बाद, दुनियाभर के देशों ने ड्रोन को अपनी सेना में शामिल करना शुरू कर दिया।

कैसे बदल गया युद्ध का तरीका

पहले जंग में सैनिक आमने-सामने लड़ते थे, जिससे कई जानें जाती थीं। वायुसेना से हमलों में पायलटों की भी जान को खतरा होता था। लेकिन अब ड्रोन की मदद से बिना सैनिक भेजे, दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और सस्ते हमले किए जा सकते हैं। साथ ही निगरानी करना, दुश्मन की हरकतों को देखना भी अब आसान हो गया है। ड्रोन अब युद्ध का एक जरूरी और खतरनाक हथियार बन चुके हैं, जो जंग के तरीके को पूरी तरह से बदल रहे हैं।