अयोध्या से उठा ये बवाल अब देशभर में सनातनियों के दिलों में आग की तरह फैल गया है. वजह? एक व्हिस्की की बोतल... नाम रखा गया-'त्रिकाल'. और बोतल पर छपी है भगवान शिव जैसी तीसरी आंख की छवि. अब सोचिए, नशे की बोतल पर शिव की पहचान? संत समाज और हिंदू संगठन फट पड़े हैं!
शिव के त्रिकालदर्शी स्वरूप का किया मज़ाक! 'त्रिकाल' शब्द महज कोई नाम नहीं, ये भगवान शिव की दिव्य दृष्टि का प्रतीक है. उज्जैन के महाकाल मंदिर से लेकर अयोध्या के संतों तक, हर जगह लपटें उठ रही हैं. महंत राजू दास महाराज ने साफ शब्दों में कहा- 'अगर नाम नहीं बदला, तो अयोध्या की सड़कों पर आंदोलन होगा, और फिर ये कंपनी न कहीं बचेगी, न दिखेगी.'
रेडिको खेतान के एमडी अभिषेक खेतान ने तो इसे भारतीय शराब इंडस्ट्री का वैश्विक ब्रांड बनाने का सपना बताया है, लेकिन संत समाज इसे सनातन धर्म पर हमला मान रहा है. उज्जैन के महंत विशाल दास महाराज ने कहा -'त्रिकाल महाकाल का स्वरूप है, इसे शराब से जोड़ना सीधा-सीधा धर्म का अपमान है!'
वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल बोले- 'पहले जूतों पर देवी-देवताओं की तस्वीर, फिर कपड़ों पर और अब शराब! कब तक सहेंगे ये अपमान?' मध्य प्रदेश के पशुपालन मंत्री लाखन पटेल ने भी कंपनी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
'त्रिकाल' नहीं बदला तो 'त्रिनेत्र' से देखेगा संत समाज! संतों का अल्टीमेटम साफ है- नाम नहीं बदला तो अयोध्या में तूफान आएगा और ये बवाल सिर्फ अयोध्या तक सीमित नहीं रहेगा. भोपाल से हरिद्वार तक, बनारस से उज्जैन तक- पूरे देश में धरना, प्रदर्शन और गिरफ्तारी की तैयारी है.