चित्रकूट में उस वक्त सनसनी मच गई जब भारत के थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के आश्रम 'तुलसी पीठ' पहुंचे. वहां जो कुछ हुआ, वो इतिहास में दर्ज हो गया - न सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि राष्ट्रवाद की नई परिभाषा लिखने के तौर पर भी.
मई 28 की सुबह, सेना प्रमुख जैसे ही आश्रम पहुंचे, जगद्गुरु ने उन्हें राम मंत्र की दीक्षा दी. लेकिन ये कोई सामान्य दीक्षा नहीं थी. यह वही मंत्र था, जिसे मां सीता ने स्वयं हनुमान को दिया था, और उसी शक्ति से उन्होंने लंका दहन कर रावण की नींव हिला दी थी.
अब आया असली 'बवाल' – इस पवित्र दीक्षा के बाद जब गुरु दक्षिणा की बारी आई, तो रामभद्राचार्य ने सीधे कहा - मुझे गुरु दक्षिणा में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) चाहिए! जी हां आपने सही पढ़ा! गुरु ने अपनी दक्षिणा में PoK की मांग रख दी और वो भी भारत के सेना प्रमुख से, जिनके पास सेना का नियंत्रण है. ये बात सुनकर वहां मौजूद हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए.
जगद्गुरु ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि 'मैंने उन्हें वही राम मंत्र दिया है जो माता सीता ने हनुमान को दिया था. हनुमान जी ने उस शक्ति से लंका को फतह किया. अब मैंने सेनाध्यक्ष से कहा है- मेरी गुरु दक्षिणा PoK है.'
यह मांग सिर्फ एक धार्मिक आग्रह नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामरिक स्तर पर एक बड़ा संदेश है. जहां एक ओर देश ‘अखंड भारत’ की बात करता है, वहीं एक संत द्वारा ऐसे स्पष्ट और चुनौतीपूर्ण शब्दों में सेना से PoK की मांग करना, देश में एक नई तरह की चेतना का संचार कर रहा है. अब पूरा देश देख रहा है कि क्या इस गुरु दक्षिणा को भारत की सेना, भविष्य में किसी ‘ऑपरेशन’ के जरिए पूरा करेगी?