नसों के दर्द के इलाज में इस्तेमाल होने वाली मशहूर दवा प्रेगाबालिन (Pregabalin) को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश के शीर्ष दवा नियामक ने इस दवा की बिक्री पर सख्त नियंत्रण लगाने का फैसला किया है। इसकी वजह है कई राज्यों से, खासकर पंजाब से, सामने आए ऐसे मामले जिनमें इस दवा का इलाज के बजाय नशे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
भारत की प्रमुख दवा नियामक संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने प्रेगाबालिन की सभी किस्मों और सभी डोज को अब शेड्यूल H1 में शामिल कर दिया है। यह फैसला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के तहत लिया गया है। इस बदलाव के बाद देशभर में इस दवा की बिक्री और निगरानी पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो जाएगी।
शेड्यूल H1 में शामिल दवाओं की बिक्री पर पहले से ज्यादा निगरानी रखी जाती है। अब मेडिकल स्टोर और दवा विक्रेताओं को इस दवा को बेचते समय कई जरूरी जानकारियां दर्ज करनी होंगी।
दवा लिखने वाले डॉक्टर का नाम और पता
मरीज का पूरा विवरण
कौन-सी दवा दी गई
कितनी मात्रा में दवा दी गई
तीन साल तक रखना होगा रिकॉर्ड
नए नियमों के अनुसार, दवा विक्रेताओं को यह पूरा रिकॉर्ड कम से कम तीन साल तक सुरक्षित रखना होगा। जरूरत पड़ने पर यह जानकारी सरकारी अधिकारियों को जांच के लिए दिखानी होगी।
इसके अलावा, प्रेगाबालिन की पैकेजिंग पर खास चेतावनी लेबल लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
अब तक प्रेगाबालिन शेड्यूल H में थी। इसका मतलब यह था कि डॉक्टर की पर्ची दिखाने पर दवा मिल जाती थी, लेकिन मेडिकल स्टोर को किसी तरह का विस्तृत रिकॉर्ड रखने की जरूरत नहीं थी।
सरकार को लगा कि इसी ढील का फायदा उठाकर दवा का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है।
CDSCO ने इस संबंध में जो अधिसूचना जारी की है, वह फिलहाल 30 दिनों की प्रक्रिया में है। इस अवधि के पूरा होने के बाद इसे अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों से ड्रग कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) और ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) जैसी सरकारी सलाहकार संस्थाएं प्रेगाबालिन के दुरुपयोग पर चिंता जता रही थीं।
इन बैठकों में लगातार यह मुद्दा उठता रहा कि यह दवा इलाज से ज्यादा नशे का साधन बनती जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रेगाबालिन बाजार में 75 mg से लेकर 300 mg तक की डोज में उपलब्ध है। यह दवा टैबलेट और कैप्सूल दोनों रूपों में मिलती है।
नसों के दर्द (न्यूरोपैथिक पेन)
फाइब्रोमायल्जिया
मिर्गी के कुछ प्रकार
के इलाज में दी जाती है। इसे कभी-कभी अन्य दवाओं के साथ भी दिया जाता है। यह दवा एक महीने से ज्यादा उम्र के बच्चों और वयस्कों को डॉक्टर की सलाह पर दी जा सकती है।
नियामकों ने बताया कि पंजाब फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट में सामने आया कि प्रेगाबालिन का इस्तेमाल मनोरंजन या नशे के लिए किया जा रहा है।
यह दवा सिर्फ लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही नहीं, बल्कि बिना लाइसेंस वाले ठिकानों से भी जब्त की गई है।
सरकारी समितियों ने 150 mg और 300 mg जैसी ऊंची डोज वाली गोलियों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इनकी इलाज में उपयोगिता सीमित है, लेकिन नशे के लिए इनका इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है।
सलाहकार पैनलों ने यह सुझाव भी दिया है कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा दी गई उच्च डोज की मंजूरियों की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए।