पंजाब सरकार ने राज्य में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए पहली बार एकीकृत राज्य जल योजना के तहत 14 सूत्रीय कार्ययोजना को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में जल संसाधन विभाग की बैठक में यह निर्णय लिया गया। योजना का मकसद भूजल को संरक्षित करना, उसे फिर से भरना और सतही जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 153 में से 115 ब्लॉक भूजल के अत्यधिक दोहन से ग्रस्त हैं और औसतन हर साल जल स्तर में 0.7 मीटर की गिरावट दर्ज की जा रही है। इस चिंताजनक स्थिति से निपटने के लिए यह योजना तैयार की गई है।
लगभग 15.8 लाख हेक्टेयर भूमि को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के तहत लाने का लक्ष्य। इससे पानी की मांग घटेगी और सिंचाई की दक्षता बढ़ेगी।
नहरों और वितरिकाओं से अतिरिक्त पानी को तालाबों में संग्रहीत कर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली से खेतों तक पहुँचाया जाएगा।
6,300 किलोमीटर के 17,000 जलमार्गों और 545 किलोमीटर की 79 नहरों को बहाल किया गया है।
नहरों से जल की पाइपलाइन व्यवस्था पर ज़ोर और खुले जल स्रोतों की जगह कार्यशील पाइप नेटवर्क की प्राथमिकता।
नए चेक डैम और तालाब बनाए जाएंगे, बाढ़ क्षेत्र की ज़ोनिंग और मॉडलिंग की जाएगी।
चेक डैम बना कर पानी तालाबों में मोड़ा जाएगा, जहाँ इसका उपचार कर खेतों में पहुंचाया जाएगा।
अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक और जल संबंधी विशेषताओं के अनुसार कार्य योजना लागू होगी।
सहभागी सिंचाई प्रबंधन के लिए किसानों की भागीदारी से जल उपयोग संघ बनाए जाएंगे।
ऊर्जा दक्षता और जल उपयोगिता को बढ़ावा देने के लिए सोलर पंपिंग सिस्टम का इस्तेमाल।
योजना में निजी कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा जिससे सरकारी व्यय का बोझ कम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना राज्य में जल संकट को दूर करने की दिशा में एक ठोस कदम है। सरकार का उद्देश्य है कि भूजल के अत्यधिक दोहन को रोका जाए, सतही जल स्रोतों का समुचित उपयोग हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को संरक्षित किया जा सके।