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Ludhiana bypoll result: लुधियाना में 'आप' का डंका! कांग्रेस-भाजपा हांफते आ रही नजर

लुधियाना पश्चिम उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के संजीव अरोड़ा की रफ्तार तेज़ जारी है. पांचवें राउंड की गिनती में अरोड़ा 2,504 वोटों की बढ़त लिए आगे चल रहे हैं. कांग्रेस उम्मीदवार भारत भूषण आशु दूसरे स्थान पर वापस आ गए हैं, जबकि भाजपा का जीवन गुप्ता तीसरे नंबर पर हैं.

👤 Sagar 23 Jun 2025 12:05 PM

लुधियाना पश्चिम विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए 19 जून को हुए मतदान के बाद अब मतगणना अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और शुरुआती आंकड़े आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए राहत भरे साबित हो रहे हैं. मतगणना के अब तक के पांच राउंड पूरे हो चुके हैं, जिनमें AAP प्रत्याशी और राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा ने निर्णायक बढ़त बना रखी है.

इस उपचुनाव को पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है, जहां कांग्रेस और भाजपा ने भी पूरी ताकत झोंक दी थी। लेकिन अब तक के रुझानों से संकेत मिल रहा है कि भगवंत मान सरकार को लुधियाना पश्चिम से बड़ी राहत मिल सकती है.

आप प्रत्याशी को शुरुआती राउंड से बढ़त

सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना के पहले ही राउंड में संजीव अरोड़ा को 2895 वोट मिले. कांग्रेस उम्मीदवार भारत भूषण आशु दूसरे स्थान पर रहे। दूसरे राउंड में भी अरोड़ा ने 5854 वोट पाकर अपनी बढ़त बनाए रखी. तीसरे राउंड में भाजपा के जीवन गुप्ता ने कांग्रेस को पीछे छोड़ा और दूसरे स्थान पर आ गए. हालांकि, पांचवे राउंड तक कांग्रेस ने फिर वापसी कर ली है.

पांचवें राउंड के बाद स्थिति

पांचवे राउंड की गिनती तक संजीव अरोड़ा 2504 वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं. कांग्रेस के भारत भूषण आशु अब तक 9816 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि भाजपा के जीवन गुप्ता एक पायदान नीचे फिसल कर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. शिरोमणि अकाली दल के परोपकार घुम्मन अब भी चौथे स्थान पर बने हुए हैं.

कम मतदान और हाईवोल्टेज प्रचार

19 जून को हुए मतदान में सिर्फ 51.33% वोटिंग दर्ज की गई, जो पिछले विधानसभा चुनाव (2022) की तुलना में लगभग 13% कम है। इस सीट पर उपचुनाव आप विधायक गुरप्रीत बस्सी गोगी के निधन के कारण कराया गया. प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता जैसे अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान और मनीष सिसोदिया ने मैदान संभाला. कांग्रेस की ओर से भूपेश बघेल ने कमान संभाली.

कांग्रेस की 'सत्ता वापसी' की उम्मीद

भारत भूषण आशु की जीत कांग्रेस के लिए पंजाब की सत्ता में वापसी की एक मजबूत उम्मीद बन सकती थी. हालांकि शुरुआती आंकड़े कांग्रेस के लिए निराशाजनक साबित हो रहे हैं. भाजपा और अकाली दल भी इस चुनाव को अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के मौके के रूप में देख रहे थे.