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Hajj 2026: शुरू हो गया हज यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन, जान लें सभी नियम...!

Hajj 2026: हज 2026 के लिए सऊदी अरब में रजिस्ट्रेशन शुरू, नुसुक प्लेटफॉर्म से पैकेज बुकिंग और SADAD पेमेंट संभव। हज इस्लाम का पांचवां स्तंभ, तीर्थयात्रा में तवाफ, सई और अराफात अनुष्ठान शामिल।

👤 Samachaar Desk 07 Mar 2026 03:04 PM

Hajj 2026: दुनियाभर के मुसलमानों के लिए हज एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक यात्रा है। मक्का, जहां काबा स्थित है और पैगंबर मुहम्मद का जन्मस्थान माना जाता है, इस्लाम के अनुयायियों के लिए विशेष स्थान रखता है। हर साल लाखों मुसलमान हज और उमराह के लिए सऊदी अरब की यात्रा करते हैं। अब हज 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

सऊदी अरब का हज और उमराह मंत्रालय अब तीर्थयात्रियों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बुकिंग की सुविधा दे रहा है। वैध निवास परमिट वाले सऊदी नागरिक और प्रवासी इस नए पोर्टल नुसुक के माध्यम से विभिन्न हज पैकेजों का चयन और बुकिंग कर सकते हैं। मंत्रालय ने सभी प्रक्रियाओं को पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक रूप में संचालित करने की जानकारी दी है।

नुसुक प्लेटफॉर्म के माध्यम से बुकिंग

जो तीर्थयात्री पहले से अपना विवरण पंजीकृत करा चुके हैं, वे नुसुक मोबाइल एप्लिकेशन या आधिकारिक वेबसाइट के जरिए उपलब्ध पैकेजों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अपनी पसंद के पैकेज का चयन करने के बाद बुकिंग बिल भी तुरंत जेनरेट किया जा सकता है। इसके भुगतान के लिए सऊदी अरब की SADAD इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।

मंत्रालय ने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए भुगतान के नियम कड़े किए गए हैं। तीर्थयात्रियों को बुकिंग इनवॉइस जारी होने के 72 घंटे के अंदर भुगतान करना जरूरी होगा। ये नियम 14 मई तक लागू रहेगा।

इस्लाम में हज का महत्व

हज इस्लाम धर्म के पांच स्तंभों में से एक है और ये सभी सक्षम मुसलमानों के लिए जीवन में कम से कम एक बार करना आवश्यक कर्तव्य है। मक्का में हर साल आयोजित होने वाला हज लाखों मुसलमानों के लिए एक गहन आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

हज के दौरान तीर्थयात्रियों को कई पवित्र अनुष्ठानों में भाग लेना होता है। इनमें तवाफ (काबा की परिक्रमा), सई (सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच चलना), और अराफात पर्वत पर प्रार्थना शामिल हैं।

तीर्थयात्रा की शारीरिक चुनौतियां

हज की यात्रा शारीरिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण होती है। तीर्थयात्री रोजाना लगभग 25 किलोमीटर तक पैदल यात्रा करते हैं। इस कारण से 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए विशेष नियम लागू हैं। उनके साथ एक स्वास्थ्यपूर्ण साथी होना अनिवार्य है, जिसकी आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।