हिंदू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इसी दिन ब्रह्माजी के मुख से मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था. इसलिए बसंत पंचमी को शिक्षा, विवेक और सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.
बसंत पंचमी आते ही प्रकृति भी अपना रूप बदलने लगती है. ठंड की विदाई और बसंत के आगमन के साथ चारों ओर पीले रंग की छटा दिखाई देने लगती है. यही कारण है कि इस दिन पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले व्यंजन विशेष महत्व रखते हैं.
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ, 23 जनवरी की रात 02:28 बजे से होगा और इसका समापन 24 जनवरी की रात 01:46 बजे पर होगा. चूंकि पंचमी तिथि की उदया तिथि 23 जनवरी को पड़ रही है, इसलिए इस वर्ष बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा.
मां सरस्वती की पूजा और विद्या से जुड़े कार्यों के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है.
पूजा का शुभ समय- सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
इस अवधि में सरस्वती पूजा, अक्षर ज्ञान की शुरुआत और पढ़ाई से जुड़े नए कार्य करना विशेष फलदायी माना जाता है.
बसंत पंचमी का दिन छात्रों और शिक्षार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. इस दिन अक्षर अभ्यास की शुरुआत करना शुभ होता है. छोटे बच्चों को पहली बार लिखना सिखाया जाता है. विद्यार्थी अपनी किताबों, कॉपियों और लेखन सामग्री की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इससे स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता बढ़ती है
श्रद्धा और विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा करने से कई सकारात्मक परिणाम मिलते हैं- ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है. पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है. प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के योग बनते हैं. कला, संगीत, लेखन और शिक्षा से जुड़े लोगों को विशेष कृपा प्राप्त होती है
बसंत पंचमी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. यदि संभव हो तो पीले रंग के कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें और वहां मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. शांत मन से देवी का ध्यान करते हुए ज्ञान, बुद्धि और विवेक की प्रार्थना करें. मां सरस्वती को पीले फूल, अक्षत, हल्दी या केसर, मिठाई या खीर और फल अर्पित करें. दीपक और अगरबत्ती जलाकर पूजा आरंभ करें.
यदि मंत्र जाप संभव हो तो “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का 11 या 21 बार जाप करें. मंत्र न आने पर मन से सरस्वती वंदना करना भी पर्याप्त माना जाता है. पूजा के समय किताबें, कॉपियां, पेन और पढ़ाई से जुड़ी सभी वस्तुएं देवी के समक्ष रखें. छोटे बच्चों से इस दिन “अ” या “ॐ” लिखवाकर अक्षर अभ्यास करवाना अत्यंत शुभ माना जाता है. अंत में मां को भोग अर्पित करें और परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें. इस दिन क्रोध, गलत शब्दों और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए. सच्चे मन और श्रद्धा से की गई सरल पूजा भी मां सरस्वती की कृपा दिलाने में सक्षम होती है.