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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिला मुफ्त राशन! 4.63 लाख लोग अब भी इंतजार में

E Shram ration card: पंजाब में ई-श्रम राशन कार्ड बनने के बावजूद करीब 1.49 लाख परिवारों के 4.63 लाख लोग अब भी मुफ्त राशन मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अधिकतर प्रवासी और मेहनतकश परिवार अपने अधिकार के लिए राशन डिपो और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

👤 Ashwani Kumar 16 Mar 2026 12:38 PM

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों के बावजूद पंजाब में बड़ी संख्या में ई-श्रम राशन कार्ड धारक अब भी मुफ्त राशन मिलने का इंतजार कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक करीब 1,49,604 परिवारों के लगभग 4,63,407 लोग पिछले एक साल से अपने हक के अनाज के लिए भटक रहे हैं। इनमें अधिकतर मजदूर और प्रवासी परिवार शामिल हैं, जो रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों से आकर यहां काम करते हैं। मुफ्त राशन मिलने की उम्मीद में ये लोग बार-बार राशन डिपो और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बने थे कार्ड

बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद फरवरी 2025 में पंजाब सरकार ने फूड एंड सप्लाई विभाग को मजदूर परिवारों के लिए ई-श्रम राशन कार्ड जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पूरे पंजाब में करीब डेढ़ लाख मजदूर परिवारों के लिए ई-श्रम राशन कार्ड बनाए गए।सरकार का उद्देश्य था कि इन कार्डों के जरिए जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत मिल सके। 

राशन डिपो और दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोग

मुफ्त अनाज मिलने की उम्मीद में मजदूर परिवार बार-बार राशन डिपो पर पहुंच रहे हैं। कई लोग प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों में भी अपनी शिकायत लेकर जा रहे हैं।

हालांकि उनकी समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। कई परिवारों का कहना है कि जब वे राशन लेने जाते हैं तो उन्हें अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया जाता है। इससे इन परिवारों में निराशा बढ़ती जा रही है।

अब सरकार से उम्मीद

लाखों ई-श्रम राशन कार्ड धारक परिवार अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही उन्हें उनके हिस्से का अनाज मिलेगा। मजदूरों का कहना है कि यदि योजना सही तरीके से लागू की जाए तो इससे हजारों गरीब परिवारों को राहत मिल सकती है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार, पंजाब सरकार या जिला प्रशासन इस मुद्दे पर कब तक ठोस कदम उठाते हैं और इन परिवारों को उनका अधिकार कब मिल पाता है।