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भगवंत मान ने नंगल डैम पर CISF तैनाती का किया विरोध, ₹8.58 करोड़ के खर्च पर उठाए सवाल

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नंगल डैम पर केंद्र सरकार द्वारा CISF की 296 जवानों की तैनाती का कड़ा विरोध किया है. उनका कहना है कि जब पंजाब पुलिस पहले से ही मुफ्त में डैम की सुरक्षा कर रही थी, तो केंद्र सरकार 8.58 करोड़ रुपये सालाना खर्च क्यों करवाना चाहती है?

👤 Sagar 22 May 2025 01:39 PM

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार द्वारा नंगल डैम की सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 296 जवानों की तैनाती के फैसले का कड़ा विरोध किया है.उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब पहले से ही पंजाब पुलिस वहां सुरक्षा प्रदान कर रही है, तो फिर अतिरिक्त बल की क्या आवश्यकता है. मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि वे शनिवार को होने वाली नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर सीधे सवाल करेंगे.

मान ने दावा किया कि CISF की इस तैनाती पर हर साल करीब 8.58 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसकी भरपाई या तो भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) या पंजाब सरकार से कराने की बात की जा रही है. उन्होंने इस प्रस्ताव पर सख्त ऐतराज जताया और साफ कहा कि “न ही BBMB और न ही पंजाब सरकार एक भी पैसा देगी.

नंगल डैम की सुरक्षा में CISF तैनाती पर भड़के  मान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भाखड़ा डैम पर केंद्रीय बलों के 296 विभिन्न रैंकों के अफ़सरों की तैनाती को मंज़ूरी दी गई है. इसका करोड़ों रुपए का अतिरिक्त खर्च पंजाब सरकार को देना पड़ेगा. हम इसका कड़ा विरोध करते हैं. केंद्र की बीजेपी सरकार ने हमेशा पंजाब को दबाने की कोशिश की है. डैम पर CISF के जवानों की तैनाती को मंज़ूरी देकर उसका खर्च पंजाब सरकार पर डालना कोई नया मामला नहीं है, इससे पहले भी पठानकोट में हुए हमले के बाद भेजी गई फोर्स का खर्च भी पंजाब सरकार से ही मांगा गया था.

संगरूर में मीडिया से बात करते हुए भगवंत मान ने केंद्र सरकार के उस पत्र की प्रति भी दिखाई, जिसमें सुरक्षा बलों की तैनाती और खर्च का उल्लेख किया गया है. उन्होंने कहा, “जब पंजाब पुलिस बिना किसी लागत के डैम की सुरक्षा कर रही है, तो इस अतिरिक्त बोझ का औचित्य क्या है? गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा के बीच नंगल डैम से जल वितरण को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है. ऐसे में केंद्र द्वारा CISF की तैनाती को राजनीतिक रूप से भी देखा जा रहा है.