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क्या अकबर ने सच में जोधा से शादी की थी? राजस्थान के गवर्नर के दावे से बवाल, जानिए पूरी कहानी

राजस्थान के गवर्नर हरिभाऊ बागड़े का कहना है कि ब्रिटिश काल के इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को काफी हद तक तोड़ा-मरोड़ा है। उन्होंने दावा किया कि ब्रिटिश इतिहासकारों ने अकबर और जोधा की शादी की कहानी को गलत तरीके से पेश किया और भारतीयों के बीच इस मिथक को पॉपुलर बना दिया.

👤 Sagar 30 May 2025 05:21 PM

हाल ही में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने एक बड़ा विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने मुग़ल सम्राट अकबर और राजपूत राजकुमारी जोधा बाई की शादी को इतिहास की एक झूठा बताया. उन्होंने कहा कि अकबर और जोधा बाई की शादी की बात केवल एक कहानी है और इसका कोई प्रमाण ‘अकबरनामा’ जैसे ऐतिहासिक दस्तावेज़ों में नहीं मिलता. यह बयान भारत के इतिहास और राजपूत गौरव को लेकर पुरानी बहस को फिर से गर्मा दिया है. आइए जानते हैं कि इस दावे में कितनी सच्चाई है.

राजस्थान के गर्वनर के दावे में कितनी सच्चाई?

राजस्थान के गवर्नर हरिभाऊ बागड़े का कहना है कि ब्रिटिश काल के इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को काफी हद तक तोड़ा-मरोड़ा है। उन्होंने दावा किया कि ब्रिटिश इतिहासकारों ने अकबर और जोधा की शादी की कहानी को गलत तरीके से पेश किया और भारतीयों के बीच इस मिथक को पॉपुलर बना दिया. उन्होंने कहा, 'इतिहास की किताबों में लिखा है कि अकबर ने जोधा से शादी की, पर यह सब झूठ है. अकबरनामा में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है. असल में राजा भरमल की बेटी को एक नौकरानी की बेटी के रूप में अकबर के साथ शादी दी गई थी.

अकबर- जोधा के शादी की कहानी फर्जी!

इस बयान से इतिहास प्रेमियों और विद्वानों में खलबली मच गई है. दरअसल, अकबर और जोधा की शादी को लेकर इतिहासकारों के बीच पहले से ही मतभेद रहे हैं. कई इतिहासकार मानते हैं कि जोधा बाई, जो कि राजा भरमल की बेटी थीं, अकबर की पत्‍नी थीं और उनकी शादी राजनीतिक गठजोड़ का हिस्सा थी. हालांकि, अकबरनामा और तुज़ुक-ए-जहांगीरी जैसे ऐतिहासिक ग्रंथों में जोधा बाई का नाम स्पष्ट रूप से नहीं मिलता, पर इसे प्रमाण के अभाव के रूप में भी नहीं देखा जा सकता क्योंकि उस समय के कई दस्तावेज़ों में केवल मुगल वंश के प्रमुख सदस्यों के नामों का उल्लेख होता था.

राजस्थान के इतिहास में जोधा बाई को एक बहादुर और गर्वशाली राजपूत राजकुमारी के रूप में याद किया जाता है, जिनकी शादी अकबर से हुई थी ताकि दोनों समुदायों के बीच सामंजस्य स्थापित हो सके. इतिहासकारों का मानना है कि अकबर ने राजपूतों के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए कई राजपूत राजकुमारियों से शादी की थी. ये शादियां राजनीतिक गठजोड़ और सामरिक रणनीति का हिस्सा थीं.

गवर्नर बागड़े ने महाराणा प्रताप के बारे में भी कहा कि उन्होंने कभी अपनी मर्यादा और सम्मान के साथ समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि इतिहास में अकबर के बारे में ज्यादा पढ़ाया जाता है जबकि महाराणा प्रताप के साहस और त्याग को कम महत्व दिया जाता है. यह बात भी भारतीय इतिहास की व्याख्या में पक्षपात को दर्शाती है.

इतिहास के जानकारों का कहना है कि इतिहास हमेशा बहुआयामी होता है और किसी एक दस्तावेज़ या स्रोत से पूरे इतिहास को साबित या खंडित नहीं किया जा सकता. अकबर और जोधा की शादी को लेकर विरोधाभासी जानकारियां इसलिए हैं क्योंकि कई स्रोतों और लोककथाओं में इसे अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किया गया है.