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ईरान में बवाल! विरोध प्रदर्शन फैलने से भारत के बड़े प्रोजेक्ट खतरे में… जानें कैसे होगा असर

Iran Protests 2025: ईरान में 2025 से जारी विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल चुके हैं और यह भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक तौर पर महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स जैसे चाबहार पोर्ट और INSTC पर असर डाल सकते हैं.

👤 Ashwani Kumar 15 Jan 2026 12:44 PM

दिसंबर 2025 से ईरान में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब देश के 100 से ज्यादा शहरों में फैल चुके हैं. ये विरोध 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे बड़े आंदोलन माने जा रहे हैं. भारत के लिए स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान से हमारे कई रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं.

विरोध प्रदर्शन की वजहें

ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरुआत में आर्थिक कारणों से हुए. ईरानी मुद्रा (रियाल) की गिरावट, महंगाई, बेरोजगारी और आवश्यक सामानों की बढ़ती कीमतों ने लोगों में नाराजगी पैदा की. शुरूआत तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जहां दुकानदारों ने हड़ताल की. धीरे-धीरे ये विरोध राजनीतिक रूप ले गए और सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए जाने लगे. महिलाओं और युवाओं की बड़ी संख्या इसमें शामिल है. सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए और हजारों गिरफ्तार हुए. इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण सही जानकारी पाना भी मुश्किल हो गया है.

भारत के लिए ईरान का महत्व

भारत और ईरान के रिश्ते रणनीतिक और आर्थिक रूप से मजबूत हैं. चाबहार बंदरगाह में भारत ने लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक पहुंच प्रदान करता है. चाबहार-जाहेदान रेल लाइन का निर्माण 2026 के मध्य तक पूरा होने वाला है.

इसके अलावा, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के जरिए माल भेजने में समय 40% और खर्च 30% तक कम होता है. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ईरान से तेल आयात करता रहा है और सूखे मेवे, चावल जैसे सामान का निर्यात करता है. BRICS और SCO जैसे मंचों पर भी ईरान भारत का सहयोगी है.

संभावित असर

ईरान में अस्थिरता भारत के लिए दोतरफा असर डाल सकती है. अगर नई सरकार भारत के साथ संबंध मजबूत करे, तो चाबहार और INSTC परियोजनाएं तेज हो सकती हैं और व्यापार बढ़ सकता है. लेकिन अस्थिरता से परियोजनाओं में देरी, तेल महंगा होना और अमेरिकी प्रतिबंधों का असर संभव है. इसके अलावा चीन को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से फायदा मिल सकता है. भारत के हजारों छात्र भी वहां फंसे हुए हैं, जिन्हें लेकर सरकार ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है.

भारत की प्रतिक्रिया

भारत सरकार ईरान में हालात पर नजर बनाए हुए है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. फिलहाल विदेश मंत्रालय ‘वेट एंड वॉच’ नीति पर काम कर रहा है.

कुल मिलाकर, ईरान में विरोध प्रदर्शन भारत के लिए चुनौती हैं. यदि हालात जल्दी सामान्य हुए, तो रणनीतिक और आर्थिक लाभ संभव हैं, वरना लंबे समय तक नुकसान उठाना पड़ सकता है.