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चेहरा देखकर लगा भूत जैसा, लंदन कैफे में भारतीय मूल के युवक से भेदभाव

लंदन के एक कैफे में भारतीय मूल के 35 वर्षीय अमित घोष के साथ उनके चेहरे की बनावट को लेकर भेदभाव किया गया. अमित को Neurofibromatosis type 1 नामक एक दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी है, जिससे उनके चेहरे पर विकृति आई है.

👤 Sagar 19 May 2025 01:16 PM

लंदन के एक कैफ़े में सेवा देने से इनकार किया जाना एक आम घटना लग सकती है, लेकिन 35 वर्षीय भारतीय मूल के बर्मिंघम निवासी अमित घोष के लिए यह एक गहरी चोट बन गई. अमित एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी 'न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1' से पीड़ित हैं, जो शरीर में गैर-घातक ट्यूमर उत्पन्न करती है और चेहरे को विकृत कर देती है.

कैफे में तिरस्कार और "भूत" जैसा महसूस

BBC से बात करते हुए अमित ने बताया कि एक दिन जब वे लंदन के एक कैफे में गए, तो वहां मौजूद लोगों की निगाहें उन्हें घूर रही थीं. सर्व करने वाली महिला ने उन्हें देखकर कहा, 'अब सर्व नहीं कर रहे,' और मुड़कर चली गई - जबकि साफ दिख रहा था कि अन्य लोगों को सर्व किया जा रहा था. अमित को ऐसा महसूस हुआ जैसे वे “कोई भूत” हों.

बदसूरत ताने और आत्म-स्वीकृति की यात्रा

11 साल की उम्र में अपनी बाईं आंख का ऑपरेशन कराने के बाद अमित का चेहरा स्थायी रूप से बदल गया. इस बदलाव के कारण उन्हें स्कूल में लगातार उपहास, ताने, और भावनात्मक आघात का सामना करना पड़ा. एक बार हैलोवीन से पहले एक सहपाठी ने ऐसा कमेंट किया कि उन्होंने सालों तक अपना चेहरा छिपा कर रखा और खुद से नफरत करने लगे.

क्रिकेट बना आत्म-विश्वास का जरिया

स्कूल के दिनों में क्रिकेट खेलते हुए उन्हें एक नया आत्मबल मिला। यह खेल उनके लिए केवल शौक नहीं, बल्कि अपने आत्म-सम्मान को फिर से पाने का जरिया बन गया. खेल के माध्यम से उन्होंने दोस्त बनाए और खुद को केवल अपने चेहरे से नहीं, बल्कि अपनी काबिलियत से पहचानना शुरू किया.

"बॉर्न डिफरेंट" किताब और सोशल मीडिया से आत्म-स्वीकृति

समय के साथ, अमित ने अपने अनुभवों को ताक़त में बदला. जब पार्क में कुछ लोगों ने उनके चेहरे का मजाक उड़ाया, तो उन्होंने आत्मविश्वास से जवाब देने का तरीका चुना. उन्होंने बच्चों के लिए “Born Different” नाम से एक किताब खुद पब्लिश की, जो आत्म-स्वीकृति और आत्म-सम्मान की भावना को बढ़ावा देती है.

अपनी पत्नी पियाली के सहयोग से उन्होंने खुद को स्वीकार करना सीखा. 2023 में उन्होंने TikTok पर अपनी यात्रा साझा करना शुरू किया, जहां उन्हें अब करीब 2 लाख फॉलोअर्स और लाखों लाइक्स मिल चुके हैं. अब अमित एक पूर्णकालिक मोटिवेशनल स्पीकर हैं. वे स्कूलों में जाकर बच्चों को यह संदेश देते हैं कि: 'चाहे कोई भी हो, सबके पास कुछ न कुछ कमी या चुनौती होती है. फर्क बस इतना है कि हम उसे कैसे अपनाते हैं. अगर हम खुद को प्यार करें, अपनाएं, तो आत्म-विश्वास अपने आप आ जाता है.