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भारत से सुलह नहीं की तो... बांग्लादेश को रूस ने दिखाया कड़ा सच, तनाव कम करने की कही बात..!

Russia Bangladesh News: बांग्लादेश में चुनाव से पहले तनाव बढ़ा है. भारत विरोधी प्रदर्शन और अल्पसंख्यकों पर हिंसा हुई. रूस के राजदूत ने रिश्तों में भरोसा बनाए रखने और तनाव कम करने की अपील की.

👤 Samachaar Desk 22 Dec 2025 07:44 PM

Russia Bangladesh News: बांग्लादेश में हाल के समय में राजनीतिक और सामाजिक हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. देश में भारत विरोधी रुख और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं ने दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रभावित किया है. बीते कुछ महीनों में भारत के दूतावास को निशाना बनाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जिससे भारत में नाराजगी भी बढ़ी है.

बांग्लादेश में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर ग्रिगोरीविच खोजिन ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि ये कदम अगले साल 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले अच्छे माहौल के लिए जरूरी है. राजदूत ने जोर दिया कि भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते भरोसे और विश्वास पर आधारित होने चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दोनों देशों के आंतरिक मामलों में दखल नहीं दे रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि किसी समझदारी भरे रास्ते से तनाव को बढ़ने से रोका जा सकता है.

चुनाव और पर्यवेक्षण

राजदूत ने 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनाव को लेकर उम्मीद जताई कि मतदान समय पर होगा. उन्होंने ये भी कहा कि वे चुनाव आयोग के संपर्क में हैं और आधिकारिक निमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं ताकि चुनाव की निगरानी की जा सके.

राजनीतिक माहौल और अस्थिरता

पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने बांग्लादेश में हालात को बहुत तनावपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि खासकर ढाका और चटगांव में स्थिति अस्थिर है, क्योंकि कुछ चरमपंथी पार्टियों और संगठनों को सत्ताधारी सरकार का संरक्षण प्राप्त है. उनके अनुसार ये संगठन अराजकता फैलाने और प्रदर्शन आयोजित करने के लिए उकसाए जा रहे हैं.

मोहिबुल हसन के अनुसार, सरकार चुनाव का शेड्यूल बदलना नहीं चाहती और सत्ता बनाए रखने के लिए कुछ लोगों और यूट्यूबरों के माध्यम से आंदोलन को जारी रख रही है. इसमें हिज्ब उत-तहरीर और जमात-ए-इस्लामी छात्र संगठन शिबिर जैसी राजनीतिक पार्टियां भी शामिल हैं.

भारत विरोधी गतिविधियां

हाल के दिनों में भारत विरोधी गतिविधियां मुख्यतः ढाका और चटगांव तक सीमित रही हैं. मोहिबुल हसन ने बताया कि कुछ उग्र छात्र और मदरसा के छात्र इन्हें शामिल होने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं. ये छात्र अपने खाने और रहने की जगह खोने के डर से इन जुलूसों में भाग लेते हैं. उनके अनुसार, यह पूरे देश में भारत विरोधी भावना का संकेत नहीं है, बल्कि केवल कुछ चरमपंथी समूह और छात्र इसका हिस्सा हैं.