यूरोपीय संघ (EU) की विदेश नीति प्रमुख और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास ने अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते मतभेदों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. उनका कहना है कि अगर पश्चिमी सहयोगी देश आपस में ही उलझते रहे, तो इसका सबसे बड़ा फायदा रूस और चीन को मिलेगा. उन्होंने साफ कहा कि सहयोगी देशों के बीच फूट वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.
18 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए काजा कैलास ने लिखा कि अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते मतभेद देखकर चीन और रूस जरूर खुश होंगे. उन्होंने कहा कि जब सहयोगी देश एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो जाते हैं, तो विरोधी ताकतों को रणनीतिक फायदा मिल जाता है.
कैलास ने खास तौर पर ग्रीनलैंड की सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि अगर इस क्षेत्र को लेकर कोई खतरा है, तो उसका हल NATO के अंदर ही निकाला जाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अलग-अलग मंचों पर बयानबाजी और सार्वजनिक विवाद सहयोगी देशों के रिश्तों को कमजोर करता है. ऐसे संवेदनशील मामलों को आपसी बातचीत और NATO के ढांचे में सुलझाना ज्यादा समझदारी होगी.
काजा कैलास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाता है, तो इससे न केवल यूरोप बल्कि अमेरिका खुद भी आर्थिक रूप से कमजोर होगा. कैलास के मुताबिक, टैरिफ युद्ध से दोनों तरफ महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ेगा, जिससे आम लोगों की जिंदगी पर असर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि व्यापारिक टकराव से सहयोगी देशों की साझा आर्थिक ताकत कमजोर होती है और यही कमजोरी रूस और चीन जैसे देश अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं. ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में आई दरार पश्चिमी दुनिया की एकता को नुकसान पहुंचा सकती है.
काजा कैलास ने यह भी साफ किया कि अमेरिका और यूरोप के बीच किसी भी तरह का विवाद यूक्रेन युद्ध के मुद्दे से ध्यान नहीं भटकाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिमी देशों का सबसे बड़ा लक्ष्य रूस के यूक्रेन पर किए गए आक्रमण को रोकना और शांति की दिशा में काम करना है. आपसी मतभेद इस रणनीतिक उद्देश्य में बाधा नहीं बनने चाहिए.
यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देश इस पर सहमत नहीं होते, तो 1 फरवरी 2026 से 8 NATO सहयोगी देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे जून 2026 तक 25% तक बढ़ाया जा सकता है.
इन देशों में डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और फिनलैंड शामिल हैं. ट्रंप इसे राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा बता रहे हैं, लेकिन इससे NATO के भीतर तनाव बढ़ गया है. EU कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समर्थन में एकजुटता दिखाई है, वहीं EU काउंसिल अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और EU की ओर से सामूहिक जवाब देने की बात कही है.
काजा कैलास की चेतावनी पश्चिमी देशों के लिए एक साफ संदेश है कि आपसी मतभेदों से केवल विरोधी ताकतें मजबूत होंगी. अमेरिका और यूरोप अगर अपनी एकता बनाए रखते हैं, तभी वे वैश्विक राजनीति में रूस और चीन जैसी शक्तियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर पाएंगे.