सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तीन दिन तक सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने अंतरिम फैसले के लिए अभी कोई निर्णय नहीं दिया।
सरकार ने बताया कि यह कानून मुस्लिम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ा है और यह संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गैर-मुसलमानों को वक्फ बनाने की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि इससे धोखाधड़ी हो सकती है। हालांकि, वे वक्फ को दान जरूर कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में वक्फ बनाने पर रोक आदिवासी समुदायों की जमीन बचाने के लिए है क्योंकि वक्फ के नाम पर उनकी जमीनों पर कब्जा हो रहा है।
वक्फ अधिनियम को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया गया है और कहा गया है कि यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
छह भाजपा शासित राज्यों ने संशोधन का समर्थन किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को इस अधिनियम को मंजूरी दी थी।
केंद्र ने कोर्ट से कहा है कि अधिनियम पर रोक न लगाई जाए क्योंकि ऐसे मामलों में कोर्ट अंतिम फैसले तक रोक नहीं लगाती।