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स्पेस स्टेशन पहुंचा ड्रैगन यान, 14 दिन अंतरिक्ष में रहेंगे शुभांशु शुक्ला

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं। यह मिशन 40 वर्षों बाद किसी भारतीय की अंतरिक्ष में वापसी है। शुभांशु अपनी टीम के साथ ISS पर 14 दिन बिताएंगे और माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।

👤 Saurabh 26 Jun 2025 04:28 PM

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रच दिया है। वह 40 साल बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बने हैं। शुक्ला और उनकी तीन सदस्यीय टीम को लेकर स्पेसएक्स का ड्रैगन अंतरिक्ष यान गुरुवार शाम 4:10 बजे (भारतीय समयानुसार) अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सफलतापूर्वक जुड़ गया। यानी ड्रैगन कैप्सूल पहले से तय समय से 20 मिनट पहले डॉक हुआ। वही अब इसके बाद 1-2 घंटे की जांच होगी, जिसमें हवा के रिसाव और दबाव की स्थिरता की पुष्टि होगी। इसके बाद क्रू ISS में प्रवेश करेगा। इस मिशन में सभी अंतरिक्ष यात्री 14 दिन तक ISS पर रहकर वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।

बता दें कि इससे पहले बुधवार को उन्होंने अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए उड़ान भरी थी। उनके साथ इस मिशन में नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोज और हंगरी के टिबोर कापू शामिल हैं।

मिशन के तहत सभी अंतरिक्ष यात्री 14 दिन ISS पर रहकर माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। शुभांशु शुक्ला इससे पहले भारतीय गगनयान मिशन के लिए भी चयनित हो चुके हैं और इस मिशन के साथ उन्होंने देश का नाम रोशन किया है।

शुक्ला ने अंतरिक्ष से भेजे संदेश में कहा कि यह अनुभव "बच्चे की तरह दोबारा जीना" जैसा है। इस मिशन से भारत, पोलैंड और हंगरी की अंतरिक्ष में ऐतिहासिक वापसी हुई है। इससे पहले भारत से 1984 में राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी।

कौन हैं टीम के सदस्य?

पैगी व्हिटसन (मिशन कमांडर, अमेरिका) – अब तक 675 दिन अंतरिक्ष में बिता चुकी हैं।

शुभांशु शुक्ला (भारत) – 39 साल के हैं और वायुसेना के पायलट रह चुके हैं।

स्लावोज (पोलैंड) – मिशन विशेषज्ञ

टिबोर कापू (हंगरी) – मिशन विशेषज्ञ

शुभांशु शुक्ला ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि माइक्रोग्रैविटी (कम गुरुत्वाकर्षण) में रहना बचपन की तरह सब कुछ दोबारा सीखने जैसा है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका मिशन युवाओं को प्रेरित करेगा, जैसे 1984 में राकेश शर्मा ने किया था।

लॉन्च कैसे हुआ?

स्पेसएक्स का फाल्कन-9 रॉकेट कैप्सूल को लेकर निकला।

रॉकेट ने रात के अंधेरे में चमकीले धुएं के साथ आसमान में उड़ान भरी।

लॉन्च के 28 घंटे बाद कैप्सूल ISS से जुड़ गया।

वहां कौन-कौन हैं?

अंतरिक्ष स्टेशन पर पहले से ही 7 लोग हैं – 3 अमेरिकी, 3 रूसी और 1 जापानी।

सभी ने एक्सिओम-4 टीम का स्वागत किया।

यह क्यों खास है?

यह भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए 4 दशकों बाद अंतरिक्ष में इंसानों की वापसी है।

एक्सिओम स्पेस नाम की कंपनी इस मिशन को चला रही है और भविष्य में निजी अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की तैयारी कर रही है।

स्पेसएक्स की उपलब्धि:

यह स्पेसएक्स की 18वीं मानव मिशन उड़ान थी।

यह अमेरिका की उन कोशिशों का हिस्सा है जिससे वह 2011 के बाद फिर से अपने दम पर अंतरिक्ष यात्री भेज रहा है।

शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष पहुंचना सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक पल है। यह मिशन विज्ञान, तकनीक और मानव जिज्ञासा की नई ऊंचाइयों को छूने का प्रतीक है।