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भारत में LPG की किल्लत को रोकने के लिए सरकार ने उठाया बड़ा कदम, जानिए कैसे प्रभावित होंगे पेट्रोकेमिकल उद्योग

भारत सरकार ने घरेलू LPG की सप्लाई बनाए रखने के लिए रिफाइनरियों को प्रोपेन-ब्यूटेन से LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया। पेट्रोकेमिकल उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

👤 Samachaar Desk 06 Mar 2026 05:02 PM

LPG Cylinder: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है। पिछले साल देश में लगभग 33.15 मिलियन मीट्रिक टन कुकिंग गैस की खपत हुई। LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का मिश्रण होती है। देश की कुल जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा होता है, जिसमें 85–90% सप्लाई मिडिल ईस्ट से आती है।

सरकार ने तेल रिफाइनरियों को कहा है कि वे अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का अधिकतम इस्तेमाल LPG बनाने में करें। साथ ही प्रोड्यूसर्स से भी निर्देश दिया गया है कि वे LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन सरकारी रिफाइनरियों को उपलब्ध कराएं, ताकि घरेलू सप्लाई निरंतर बनी रहे।

गैस की सप्लाई कैसे होगी

गृह उपयोग के लिए LPG मुख्य रूप से सरकारी तेल कंपनियों के माध्यम से वितरित किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन

देश में करीब 33.2 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं। जनवरी 2026 से अमेरिका से LPG का आयात भी शुरू हो गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने नवंबर 2025 में अमेरिकी खाड़ी तट से लगभग 2.2 मिलियन टन LPG आयात करने का अनुबंध किया है।

पेट्रोकेमिकल उत्पादन पर असर

प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG बनाने में लगाने से कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन कम हो सकता है। इनमें अल्काइलेट्स शामिल हैं, जो पेट्रोल में मिलाए जाते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां हर महीने इन्हें निर्यात करती रही हैं।

सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल उत्पादन में न लगाएं, बल्कि LPG बनाने में प्राथमिकता दें। इससे पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है क्योंकि पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स जैसी चीजों की कीमत LPG से अधिक होती है। इस निर्णय का उद्देश्य देश में घरेलू LPG की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है, भले ही इसके कारण कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन प्रभावित हो।