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Sheetala Ashtami 2026: कब है शीतला अष्टमी 11 या 12, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व?

Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी कुछ ही दिनों में आने वाली है। इस दिन शीतला माता की पूजा होती है और बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। ये पर्व चेचक और त्वचा रोगों से सुरक्षा का प्रतीक है।

👤 Samachaar Desk 06 Mar 2026 04:37 PM

Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी हर साल होली के बाद मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। ये पर्व होलिका दहन के आठवें दिन और चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। खासकर उत्तर भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा में लोग इसे बड़े श्रद्धा भाव से मनाते हैं।

इस साल शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 को पड़ रही है। अष्टमी तिथि 11 मार्च की रात 01:54 से शुरू होकर 12 मार्च की सुबह 04:19 तक रहेगी। पूजा और व्रत करने के लिए 11 मार्च की सुबह 6:36 से शाम 6:27 तक का समय उपयुक्त माना गया है। इस दिन लोग विशेष रूप से शीतला माता की पूजा करते हैं और घर-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

बासी भोजन का महत्व

शीतला अष्टमी की सबसे खास परंपरा है बासी भोजन का भोग। अन्य पूजा-पाठ में लोग ताजा भोजन चढ़ाते हैं, लेकिन शीतला माता को बासी और ठंडा भोजन पसंद है। इसलिए इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता।

सप्तमी तिथि को ही पकवान तैयार किए जाते हैं जैसे- पूरी, पकौड़ी, कढ़ी, मीठे चावल और हलवा. फिर अगले दिन शीतला अष्टमी पर इन्हें माता को भोग के रूप में चढ़ाया जाता है। इस वजह से इस पर्व को कई स्थानों पर बसौड़ा या बासोड़ा भी कहा जाता है।

शीतला अष्टमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की पूजा की जाती है। उन्हें रोग-शोक और विशेष रूप से चेचक व त्वचा रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है। ‘शीतला’ शब्द का अर्थ होता है “शीतलता देने वाली”, और लोक मान्यता के अनुसार माता के आशीर्वाद से परिवार में स्वास्थ्य और शांति बनी रहती है।

शीतला अष्टमी का पर्व हमें ये भी याद दिलाता है कि भोजन, स्वास्थ्य और सफाई का ध्यान रखना कितना जरूरी है। यह पर्व पारंपरिक मान्यताओं और धार्मिक विश्वासों के साथ-साथ सामाजिक जुड़ाव का भी प्रतीक है।