SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को हिंडनबर्ग रिपोर्ट से जुड़े मामले में लोकपाल ने क्लीन चिट दे दी है। लोकपाल की एंटी करप्शन बॉडी ने कहा कि उनके खिलाफ की गई सभी शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है।
लोकपाल ने आदेश में कहा, 'हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि शिकायतों में लगाए गए आरोप अनुमानों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इसके अलावा इस मामले में कोई भी वेरिफाइड मटेरियल नहीं मिला है। इसलिए उनके खिलाफ की गईं सभी शिकायतों को खारिज किया जाता है।'
लोकपाल ने कहा, 'शिकायतकर्ताओं ने इस स्थिति के प्रति सचेत रहते हुए रिपोर्ट से स्वतंत्र होकर आरोपों को स्पष्ट करने का प्रयास किया। लेकिन हमारे द्वारा आरोपों के एनालिसिस से यह निष्कर्ष निकला कि वे सभी आरोप अपुष्ट, अप्रमाणित और तुच्छ हैं।'
2024 के अंत में अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया कि SEBI (भारतीय शेयर बाजार की निगरानी संस्था) की प्रमुख माधवी पुरी बुच और उनके पति की अडानी ग्रुप के विदेशी फंड्स में हिस्सेदारी है।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि SEBI और अडानी ग्रुप के बीच मिलीभगत है, यानी दोनों मिलकर निवेशकों को गुमराह कर रहे हैं।
माधवी पुरी बुच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की पहली महिला अध्यक्ष थीं, जिन्होंने 1 मार्च 2022 से 28 फरवरी 2025 तक इस पद पर कार्य किया। वह निजी क्षेत्र से आने वाली पहली व्यक्ति थीं जिन्हें SEBI का नेतृत्व सौंपा गया था।
माधवी का जन्म 12 जनवरी 1965 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली से गणित में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद से MBA किया। StarsUnfolded
माधवी ने 1989 में ICICI बैंक में प्रोजेक्ट फाइनेंस एनालिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। वह ICICI सिक्योरिटीज की CEO भी रहीं और बाद में सिंगापुर स्थित प्राइवेट इक्विटी फर्म ग्रेटर पैसिफिक कैपिटल में कार्यरत रहीं।