देश में सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे युवाओं को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. गुरुवार सुबह से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस फर्जीवाड़े के खिलाफ देश के 6 राज्यों के 15 शहरों में एक साथ छापेमारी शुरू की है. यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ हो रही है, जो सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर भोले-भाले उम्मीदवारों से लाखों रुपये ऐंठ रहे थे.
जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित गिरोह था, जो खुद को सरकारी विभागों से जुड़ा दिखाकर लोगों को नौकरी का झांसा देता था. खासतौर पर भारतीय रेलवे और करीब 40 अन्य सरकारी विभागों के नाम पर यह ठगी की जा रही थी. रेलवे के अलावा डाक विभाग, वन विभाग, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, हाई कोर्ट, लोक निर्माण विभाग, बिहार सरकार, डीडीए और राजस्थान सचिवालय जैसे बड़े नामों का इस्तेमाल किया जाता था.
इस गैंग की सबसे बड़ी चालाकी यह थी कि ये लोग ऐसे फर्जी ईमेल अकाउंट बनाते थे, जो बिल्कुल सरकारी ईमेल आईडी जैसे दिखते थे. इन ईमेल के जरिए उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र और कॉल लेटर भेजे जाते थे. कागज इतने असली लगते थे कि किसी को शक ही नहीं होता था कि ये फर्जी हैं.
लोगों का भरोसा जीतने के लिए गिरोह ने एक और खतरनाक तरीका अपनाया. कुछ लोगों को 2 से 3 महीने तक नियमित सैलरी भी भेजी गई. खासतौर पर आरपीएफ, टीटीई और रेलवे टेक्नीशियन जैसे पदों के नाम पर लोगों को फंसाया गया. जब उम्मीदवार को लगने लगता था कि नौकरी पक्की है, तब उनसे मोटी रकम वसूल ली जाती थी.
फिलहाल ED इस मामले में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात और केरल में छापेमारी कर रही है.
यह मामला उन लाखों युवाओं के लिए एक चेतावनी है, जो जल्द नौकरी पाने की उम्मीद में किसी भी ऑफर पर भरोसा कर लेते हैं. सरकारी नौकरी की प्रक्रिया लंबी जरूर होती है, लेकिन वह हमेशा पारदर्शी और आधिकारिक होती है. किसी भी अनजान ईमेल, कॉल या पैसे मांगने वाले ऑफर से सावधान रहना बेहद जरूरी है.
ED की इस कार्रवाई से साफ है कि सरकार ऐसे फर्जीवाड़े पर सख्त नजर बनाए हुए है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.