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पुरानी टैक्स व्यवस्था खत्म होगी या नहीं? करोड़ों टैक्सपेयर्स के सबसे बड़े सवाल पर सरकार ने तोड़ी चुप्पी

सरकार ने साफ किया है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था अभी बंद नहीं होगी. नई व्यवस्था भले ही ज्यादा लोग चुन रहे हों, लेकिन करदाताओं को फिलहाल दोनों विकल्पों में से चुनने की आजादी रहेगी.

👤 Samachaar Desk 05 Feb 2026 02:29 PM

पिछले कुछ समय से आयकर रिटर्न भरने वाले लोगों के बीच एक बात लगातार चर्चा में थी. सवाल ये था कि क्या सरकार पुरानी टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह बंद करने जा रही है. जिन लोगों ने होम लोन लिया है, बीमा कराया है या पीपीएफ जैसी योजनाओं में पैसा लगाया है, उनके लिए ये चिंता की बात थी.

अब इस पर सरकार की ओर से स्थिति साफ कर दी गई है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने बताया है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था को अभी हटाने की कोई योजना नहीं है.

सरकार ने क्या कहा?

सीबीडीटी के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि भले ही बड़ी संख्या में लोग नई टैक्स व्यवस्था को चुन रहे हों, लेकिन सरकार फिलहाल पुरानी व्यवस्था को खत्म नहीं कर रही है.

उन्होंने ये भी कहा कि सरकार करदाताओं को अपनी सुविधा के अनुसार टैक्स व्यवस्था चुनने की आजदी देना चाहती है. यानी अभी दोनों ऑप्शन खुले रहेंगे.

कितने लोग नई टैक्स व्यवस्था अपना चुके हैं?

आंकड़ों के अनुसार, लगभग 88 प्रतिशत व्यक्तिगत करदाता अब नई टैक्स व्यवस्था के तहत रिटर्न भर रहे हैं. ये बदलाव काफी बड़ा माना जा रहा है.

इसके बावजूद सरकार का मानना है कि सभी लोगों की आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं होती, इसलिए एक ही व्यवस्था सभी पर लागू करना सही नहीं होगा.

किन लोगों के लिए जरूरी है पुरानी टैक्स व्यवस्था?

टैक्स जानकारों का कहना है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था आज भी कई लोगों के लिए फायदेमंद है. जिन लोगों पर बड़ा होम लोन है, जो हर महीने पीएफ, पीपीएफ या जीवन बीमा में निवेश करते हैं, या जिन्हें एचआरए और एलटीए का लाभ मिलता है, उनके लिए पुरानी व्यवस्था में टैक्स कम हो सकता है.

इसके अलावा जो लोग लंबे समय की बचत और निवेश की आदत रखते हैं, उनके लिए भी यह व्यवस्था उपयोगी बनी हुई है.

नई टैक्स व्यवस्था की ओर झुकाव क्यों बढ़ा?

नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स की दरें कम हैं और छूट की सीमा ज्यादा है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें निवेश के प्रमाण दिखाने की झंझट नहीं होती.

युवा कर्मचारी और नए नौकरीपेशा लोग, जिनके पास न तो होम लोन है और न ही बड़ी बचत योजनाएं, उनके लिए नई व्यवस्था आसान और सीधी है. रिटर्न भरने की प्रक्रिया भी इसमें सरल हो जाती है.

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार पुरानी टैक्स व्यवस्था को अचानक बंद नहीं करेगी. समय के साथ जब लोगों के पुराने लोन खत्म होंगे और निवेश की आदतें बदलेंगी, तो इसकी जरूरत अपने आप कम होती जाएगी.

नई पीढ़ी के कामकाजी लोगों के लिए नई व्यवस्था ज्यादा अनुकूल है, इसलिए धीरे-धीरे पुरानी व्यवस्था का उपयोग कम हो सकता है. लेकिन जब तक बड़ी संख्या में लोग अपनी वित्तीय योजना पुराने ढांचे पर आधारित रखते हैं, तब तक सरकार उन्हें विकल्प देती रहेगी.