Sheetla Mata Ka Vahan Kya Hai: आज पूरे देश में शीतला अष्टमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। ये त्योहार हर साल चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां शीतला की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन मां को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इसलिए इस पर्व को कई जगह बसौड़ा या बासोड़ा भी कहा जाता है।
दरअसल, इस दिन चढ़ाया जाने वाला भोजन एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि को ही बना लिया जाता है। अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और उसी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां शीतला की पूजा करने से संक्रामक रोगों, खासकर त्वचा से जुड़ी बीमारियों से रक्षा मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
सनातन धर्म में देवी-देवताओं की सवारी का विशेष महत्व बताया गया है। हर देवता किसी न किसी वाहन से जुड़े होते हैं, जो उनके गुणों और शक्ति का प्रतीक होता है। जैसे मां दुर्गा की सवारी शेर है, मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू माना जाता है और भगवान गणेश का वाहन मूषक यानी चूहा है।
इसी तरह मां शीतला की सवारी गधा मानी जाती है। आमतौर पर गधे को एक साधारण और मेहनती जानवर माना जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसका अपना खास महत्व है। इसलिए कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर मां शीतला ने गधे को ही अपना वाहन क्यों चुना।
धार्मिक ग्रंथों में मां शीतला को रोगों को दूर करने वाली देवी माना गया है। विशेष रूप से चेचक और अन्य त्वचा रोगों से बचाव के लिए उनकी पूजा की जाती है। स्कंद पुराण में मां शीतला का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि मां शीतला गधे पर सवार रहती हैं।
उनके हाथों में कलश, झाड़ू और सूप होते हैं और वे नीम के पत्तों की माला धारण करती हैं। नीम को भी औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, इसलिए मां शीतला के साथ इसका विशेष संबंध बताया गया है।
गधे को बहुत ही मेहनती, धैर्यवान और सहनशील पशु माना जाता है। वह कठिन परिस्थितियों में भी लगातार काम करता रहता है और जल्दी हार नहीं मानता। इसके अलावा गधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी मजबूत मानी जाती है, जिससे वह आसानी से बीमार नहीं पड़ता।
चूंकि मां शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है, इसलिए गधे को उनकी सवारी के रूप में देखा जाता है। गधा हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में धैर्य, सहनशीलता और मेहनत के साथ आगे बढ़ने से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। यही वजह है कि धार्मिक मान्यताओं में मां शीतला और गधे का यह संबंध खास महत्व रखता है।