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Amalaki Ekadashi 2026 Date: 26 या 27 कब है आमलकी एकादशी, इस दिन क्या करें, जानें लाभ

Amalaki Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी को काफी माना जाता है. आमलकी एकादशी एक अलग एकादशी होती है, इसे करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सब कुछ अच्छा रहता है-

👤 Sanskriti 20 Feb 2026 10:15 AM

Aamlaki Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है. साल भर में आने वाली सभी एकादशियों में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी की अपनी अलग जगह होती है. इसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है. ये दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है, लेकिन नई शादीशुदा महिलाओं के लिए ये व्रत काफी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत कपल के जीवन में प्रेम, सुख और समृद्धि लाता है.

आमलकी एकादशी 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार साल 2026 में आमलकी एकादशी की तिथि इस प्रकार है एकादशी तिथि शुरूआत होग: 27 फरवरी 2026, सुबह 12:33 बजे से और एकादशी तिथि खत्म होगी 27 फरवरी 2026, रात 10:32 बजे तक. वहीं लोगों के व्रत रखने का समय 27 फरवरी 2026, शुक्रवार है. इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं.

नवविवाहित महिलाओं के लिए क्यों है खास?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे. इस कारण इसे रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. नवविवाहित महिलाएं अगर शादी के बाद शुरुआत के सालों में ये व्रत करती हैं, तो उन्हें माता पार्वती और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कहा जाता है कि इससे पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है. साथ ही घर में सुख-शांति आती है और संतान सुख का मार्ग भी प्रशस्त होता है.

‘आमलकी’ शब्द का अर्थ है आंवला. आयुर्वेद में आंवले को अमृत समान माना गया है. धार्मिक दृष्टि से भी आंवले का पेड़ बहुत पवित्र माना जाता है. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने और उसका सेवन करने से शरीर को शक्ति मिलती है. ये रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है.

इस दिन क्या करें?

आमलकी एकादशी पर कुछ विशेष कार्य करने से व्रत का फल ज्यादा मिलता है.

इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु का ध्यान करें. पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और उसकी परिक्रमा करें. ऐसा करना शुभ माना गया है.

आंवले का दान करना पुण्यदायक होता है. साथ ही प्रसाद के रूप में आंवले का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है.

चूंकि इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु और शिव-पार्वती को गुलाल अर्पित किया जाता है. ये उत्सव और आनंद का प्रतीक है.

आमलकी एकादशी के लाभ

कहा जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने पर अनजाने में हुए पापों का प्रभाव कम होता है.

एकादशी व्रत करने वाले भक्त को अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है और वो वैकुंठ धाम को प्राप्त करता है.

यदि एकादशी शुक्रवार को पड़े तो इसे विशेष शुभ माना जाता है. इससे लक्ष्मी-नारायण का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है.

आमलकी एकादशी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि आस्था, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख का संगम है. इस दिन सच्चे मन से पूजा और व्रत करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है साथ ही घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.