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वाइब कोडिंग क्या है? सुंदर पिचाई और श्रीधर वेम्बू ने खोला कोडिंग का राज

वाइब कोडिंग AI और बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) का इस्तेमाल कर कोडिंग को आसान बनाती है। यूजर बस नेचुरल भाषा में निर्देश देता है और AI एप्लिकेशन या फीचर तैयार करता है।

👤 Samachaar Desk 23 Mar 2026 10:42 AM

आजकल टेक्नोलॉजी की दुनिया में वाइब कोडिंग का नाम बहुत सुना जा रहा है। हर कोई इसके बारे में बात कर रहा है, लेकिन सच में यह क्या है, बहुत कम लोग समझते हैं। बड़ी टेक कंपनियों के CEO और फाउंडर्स ने भी इस पर अपनी राय दी है। इस लेख में हम बताएंगे कि वाइब कोडिंग क्या है और क्यों यह डेवलपर्स और टेक एक्सपर्ट्स के बीच चर्चा में है।

वाइब कोडिंग क्या है?

वाइब कोडिंग एक नई तकनीक है जो AI और बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) का इस्तेमाल करके सॉफ्टवेयर बनाने के तरीके को बदल देती है। इसमें यूजर को बस प्राकृतिक भाषा में बताना होता है कि वह क्या बनाना चाहता है। उदाहरण के लिए, आपको Python या JavaScript जैसी जटिल भाषाएं सीखने की जरूरत नहीं पड़ती।

AI आपकी बात को समझकर एप्लिकेशन या फीचर तैयार कर देता है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि एप्लिकेशन और नए फीचर्स को जल्दी और आसानी से तैयार किया जा सके। लेकिन इसके लिए यूजर को सही तरीके से AI को निर्देश (प्रॉम्प्ट) देना जरूरी होता है।

वाइब कोडिंग शब्द की उत्पत्ति

फरवरी 2025 में OpenAI के को-फ़ाउंडर Andrej Karpathy ने वाइब कोडिंग शब्द को पेश किया। उन्होंने बताया कि यह नई कोडिंग शैली LLM की मदद से संभव हुई है। उनके अनुसार, इसमें यूजर को कोड की बारीकियों की चिंता किए बिना बड़े कॉन्सेप्ट को अपनाने का मौका मिलता है।

तब से वाइब कोडिंग तेजी से लोकप्रिय हुआ है और कई टूल्स जैसे Copilot, Codeium, Cursor, CodeWhisperer, Qodo और Replit इसे सपोर्ट करने लगे हैं।

सुंदर पिचाई का नजरिया

गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने हाल ही में वाइब कोडिंग पर अपनी राय दी। उनके अनुसार, यह कोडिंग को आसान और मजेदार बना रहा है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक से चीजें अब पहले से अधिक सरल हो गई हैं और यह और भी बेहतर होने वाली है।

श्रीधर वेम्बू का दृष्टिकोण

जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू का कहना है कि वाइब कोडिंग जटिल कोडिंग लेयर को आसान बनाती है। वे कहते हैं कि कोड तब तक “मैजिक” जैसा होता है जब तक कंपाइलर इसे पढ़ने योग्य कोड में बदल नहीं देता। वाइब कोडिंग दिखाती है कि भविष्य में इंसान और AI मिलकर मैन्युअल कोडिंग की जगह ले सकते हैं।