पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा नशे के खिलाफ ली गई शपथ पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने इस कदम को ‘शर्मनाक हरकत’ बताते हुए कहा कि कैमरे के सामने इस तरह की शपथ लेना जनता को गुमराह करने जैसा है.
खैहरा का कहना है कि नशे के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सरकार को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए.
सुखपाल सिंह खैहरा ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की निजी आदतों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. खैहरा ने कहा कि ऐसे में नशे के खिलाफ सार्वजनिक शपथ लेना नैतिकता के खिलाफ है. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री से जुड़े कुछ पुराने वीडियो और घटनाएं लोगों के बीच चर्चा का विषय रही हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति खुद विवादों में रहा हो, तो वह किस आधार पर सार्वजनिक रूप से नशे के खिलाफ शपथ ले सकता है. उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि वे स्पष्ट करें कि क्या वे पूरी तरह किसी भी तरह के नशे से दूर हैं. खैहरा के अनुसार, शराब भी नशे की श्रेणी में आती है और इस पर भी स्पष्ट रुख होना चाहिए.
खैहरा ने आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जब रैली के दौरान शपथ ली जा रही थी, तब पार्टी के नेता और कार्यकर्ता किस सोच के साथ उसमें शामिल हुए.
उन्होंने इसे एक राजनीतिक दिखावा करार देते हुए कहा कि पंजाब को सिर्फ भाषणों की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर नशे के खिलाफ मजबूत कार्रवाई की जरूरत है.
इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. एक तरफ कांग्रेस सरकार की नीयत पर सवाल उठा रही है, वहीं सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक हमला बता सकता है.
नशे का मुद्दा पंजाब में लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय रहा है. ऐसे में इस पर हो रही सियासी बहस आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है.