पंजाब सरकार ने खरीफ सीजन 2025 की शुरुआत एक अहम फैसले के साथ की है. मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 15 मई से धान की सीधी बिजाई (Direct Seeding of Rice - DSR) तकनीक को अपनाने का एलान किया है. इस बार सरकार का इरादा 5 लाख एकड़ जमीन पर DSR विधि से खेती करवाने का है, जो पिछले साल की तुलना में काफी बड़ी छलांग मानी जा रही है.
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में 2.53 लाख एकड़ क्षेत्र में इस तकनीक का इस्तेमाल हुआ था, जबकि 2025 में सरकार ने इसका लक्ष्य करीब 47 प्रतिशत बढ़ाकर तय किया है. इससे यह स्पष्ट है कि सरकार पर्यावरण और जल संरक्षण जैसे मसलों पर गंभीरता से काम कर रही है. DSR तकनीक के तहत धान की पारंपरिक पौध रोपण पद्धति की जगह सीधे बीज खेत में बोए जाते हैं। इससे पानी की बचत, लेबर कॉस्ट में कमी और खरपतवार नियंत्रण में आसानी होती है.
इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों के लिए सरकार ने प्रति एकड़ ₹1500 की वित्तीय सहायता देने का भी एलान किया है. यह लाभ न केवल सामान्य धान उत्पादकों को मिलेगा, बल्कि बासमती धान की खेती करने वाले किसान भी इस योजना के तहत मदद पा सकेंगे. अब तक राज्य सरकार ने 21,338 किसानों को ₹29.02 करोड़ की राशि वितरित की है, जिससे इस योजना की गति और गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
इस पहल से एक ओर जहां कृषि लागत में कमी आएगी, वहीं जल संकट से जूझते पंजाब के लिए यह तकनीक राहत बन सकती है. सरकार का यह प्रयास न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों की आय और उत्पादन क्षमता को भी बढ़ावा देगा.